गंगा तट पर दो महान संतों का हुआ मिलन

सुखद पल. आचार्य महाश्रमण का हुआ स्वागत राष्ट्रव्यापी अहिंसा पद यात्रा के तहत मुंगेर पहुंचे आचार्य श्री महाश्रमण जी का शनिवार को योग नगरी मुंगेर में भव्य स्वागत किया गया. बिहार योग विद्यालय परिसर में स्वामी निरंजनानंद सरस्वती व आचार्य का मिलन यादगार क्षण बना. मुंगेर : जैन धर्म के श्वेताबंर तेरापंथ के 11वें आचार्य […]

सुखद पल. आचार्य महाश्रमण का हुआ स्वागत

राष्ट्रव्यापी अहिंसा पद यात्रा के तहत मुंगेर पहुंचे आचार्य श्री महाश्रमण जी का शनिवार को योग नगरी मुंगेर में भव्य स्वागत किया गया. बिहार योग विद्यालय परिसर में स्वामी निरंजनानंद सरस्वती व आचार्य का मिलन यादगार क्षण बना.
मुंगेर : जैन धर्म के श्वेताबंर तेरापंथ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण जी का शनिवार को योगनगरी मुंगेर में भव्य स्वागत किया गया. राष्ट्रव्यापी अहिंसा पद यात्रा के तहत मुंगेर पहुंचे आचार्य का जहां शहरवासियों ने इंडोर स्टेडियम में स्वागत किया. वहीं बिहार योग विद्यालय परिसर में परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती एवं आचार्य श्री महाश्रमण का मिलन यादगार क्षण बना. उत्तरवाहिनी गंगा की पवित्र तट पर दो महान संतों के मिलन को आध्यात्मिक स्तर पर इस युग का एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है.
जिनमें विशेष प्रज्ञा होती है, वह महाप्रज्ञ हो सकता है
मुंगेर पहुंचने पर आचार्य श्री अपने अनुयायियों के साथ बिहार योग विद्यालय पहुंचे. जहां योग पीठ के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने उनका स्वागत किया. दोनों संतों ने मानव कल्याण के विभिन्न बिंदुओं पर एक दूसरे से बातचीत की. मानवता के कल्याण के लिए 9 नवंबर 1914 को दिल्ली से निकली राष्ट्रव्यापी अहिंसा पद यात्रा लगभग 40 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर मुंगेर पहुंची. मुंगेर स्टेडियम में शहरवासियों को अपने अमृत वचनों से संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने जन-जन में सद‍्भावना को जागृत करने, व्यवहार में नैतिकता लाने और समाज को नशा मुक्ति की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हुए कहा कि जिसमें विशेष प्रज्ञा होती है वह महाप्रज्ञ हो सकता है. तेरापंथ धर्म संघ के दशमाधिशास्ता आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की सातवीं महाप्राण दिवस होने के कारण आचार्य ने उनके प्रति भक्तिभाव को प्रकट करते हुए उनके गुणों का बखान किया. इस मौके पर धर्म संघ की असाधारण साध्वी प्रमुख्या ने भी आचार्य महाप्रज्ञ जी के प्रति अपना श्रद्धा अर्पित की. मुनि अनेकांत कुमार ने गीत के माध्यम से अपने भाव सुमन अर्पित किये. मौके पर जैन समाज के राजेश जैन, अणुव्रत शिक्षक के नवल किशोर प्रसाद सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

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