कुव्यवस्था. आइसीयू में डायरियल व एनेमिक मरीजों को किया जा रहा भरती
सदर अस्पताल स्थित आइसीयू (गहन चिकित्सा केंद्र) की स्थिति दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है. इस वार्ड में हृदय रोग के रोगियों के इलाज की व्यवस्था है. जबकि वातानुकूलित व्यवस्था के कारण वार्ड में प्वाइजनिंग, एनेमिक व डायरिया पीड़ित रोगियों को भरती किया जा रहा है. साथ ही जिस प्रकार आइसीयू में रोगी के परिजनों की भीड़ लगती है उससे वार्ड में संक्रमण का भी खतरा बढ़ गया है.
मुंगेर : बुधवार की शाम हजरतगंज खानकाह निवासी मो जमील अहमद की तबीयत अचानक बिगड़ जाने पर परिजनों ने उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया़ जहां चिकित्सक ने डायरिया से पीड़ित रोगी को इलाज के लिए आइसुलेशन वार्ड में भरती कर दिया़ वार्ड में दुर्गंध तथा साफ-सफाई का अभाव देख मरीज के परिजनों ने अस्पताल के एक चिकित्सक से संपर्क साधा तथा मरीज के लिए बेहतर वार्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया. जिस पर उक्त चिकित्सक ने बिना सोचे-समझे आइसीयू वार्ड में भरती कर दिया़
जमील को आइसीयू में भरती करते ही वहां पर पहले से भरती हृदय रोग से पीड़ित मरीजों की धड़कनें और भी बढ़ गयी़ं डायरिया से पीड़ित मरीज से मिलने के लिए काफी संख्या में उसके परिजन व सगे-संबंधी आइसीयू के भीतर प्रवेश करते रहे़ इस कारण घंटों तक आइसीयू में अफरातफरी रही. जबकि आइयीसू में मरीज, चिकित्सक तथा पारा मेडिकल स्टाफ के अलावा अन्य किसी का प्रवेश करना वर्जित है़
आइसीयू में अब तक 15 मरीज हुए हैं भरती:
आइसीयू से मिली जानकारी के अनुसार, यहां अबतक कुल 15 मरीजों को भरती किया गया है़ जिसमें एक प्वाइजनिंग, एक एनेमिक तथा एक डायरियल मरीज भी शामिल है़ बाकी के 12 मरीज हृदय रोग से संबंधित थे़ बुधवार को आइसीयू में हृदय रोग से पीड़ित रामबहादुर सिंह, मुर्गियाचक निवासी मो कयूम, तोपखाना बाजार निवासी रामदास राउत, गुलजार पोखर निवासी जय कुमार गुप्ता, बरियारपुर निवासी एनेमिक मरीज अंशु कुमारी तथा डायरिया पीड़ित हजरतगंज खानकाह निवासी मो जमील अहमद भरती था.
कहते हैं आइसीयू विशेषज्ञ
सदर अस्पताल के पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी सह आइसीयू सेवा विशेषज्ञ डॉ वाइके दिवाकर ने बताया कि मुंगेर सदर अस्पताल का आइसीयू सिर्फ हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए ही है़ यहां पर ब्रेन हेमरेज वाले मरीजों का भी इलाज नहीं हो सकता़ यदि यहां पर डायरिया से ग्रसित मरीज को भरती किया जाता है तो वहां भरती हृदय रोग से पीड़ित रोगी को खतरा हो सकता है़
