मरीजों का न किया जाता वजन और न ही मापी जाती बीपी, रोग का नाम बताते ही मरीजों को मिल जाती दवा की लिस्ट
मुंगेर : जी हां! सदर अस्पताल में सिर्फ एक मिनट में ही मरीज का इलाज हो जाता है़ तभी तो महज चार घंटे के ओपीडी में 200 से 250 मरीजों का स्वास्थ्य जांच कर चिकित्सक उसके पुरजे पर दवा लिख देते हैं. यहां मरीजों के स्वास्थ्य जांच के लिए न तो वजन कराया जाता है और न ही उसका बीपी ही मापा जाता है़ यह अलग बात है कि रोगी को बार-बार एक ही बीमारी के लिए अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है़ हालांकि इससे मरीजों को फायदा हो या न हो, लेकिन ओपीडी में मरीजों की संख्या बरकरार रहती है़
बिना जांचे-परखे लिख दी जाती है दवा
सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है़ कहने को तो यहां अलग-अलग तरह के मरीजों के लिए अलग-अलग आउटडोर सेवा की व्यवस्था दी गयी है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति जीओपीडी की है, जहां पर प्रतिदिन चार घंटे में लगभग 250 या उससे भी अधिक मरीजों का इलाज बिना जांचे-परखे किया जाता है़ यहां तक कि डॉक्टर साहब खड़े-खड़े ही रोगी का इलाज करते रहते हैं. ऐसे में न तो मरीजों के बीमारी का सही से पता चल पाता है और न ही इसका समुचित इलाज ही हो पाता है़
लल्लूपोखर निवासी वृद्ध रामावतार प्रसाद ने बताया कि उन्हें पिछले कई महीने से खांसी हो रही है. घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद चिकित्सक के कक्ष में पहुंचा और चिकित्सक को बताया कि उन्हें खांसी हो रही है़ तब चिकित्सक ने बिना कोई सवाल किये ही उनके पुरजे पर कफ सीरफ लिख दिया. जबकि वह कई माह से कफ सीरप ही पी रहा है. बावजूद उनकी खांसी ठीक नहीं हो रही. वहीं वसंती तालाब निवासी शांति देवी ने बताया कि उन्हें पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा है़
यहां आकर जब वह चिकित्सक से अपनी हालत बताती है, तब उसे तीन दिनों के लिए दवा लिख दिया जाता है़ किंतु दवा का असर खत्म होते ही बुखार फिर से आ जाता है़ कभी भी थर्मामीटर लगा कर उसके शरीर का ताप भी नहीं मापा गया है़ दलहट्टा निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि यहां चिकित्सक न तो मरीज का वजन करते हैं और न ही ब्लडप्रेशर का जांच करते हैं. इतना ही नहीं मरीजों को चिकित्सक द्वारा आला तक नहीं लगाया जाता है़
मरीजों के जांच के लिए वेइंग मशीन, बीपी मशीन, थर्मामीटर तथा आला सहित अन्य आवश्यक उपकरण अस्पताल में उपलब्ध हैं. जरूरत के अनुसार मरीजों का जांच भी किया जाता है़
