सरकारी रथ में गांधी का गलत संदेश

लापरवाही . मुंगेर के डीएम ने हरी झंडी दिखा रथ को किया रवाना रवाना रथ नजारत परिसर में खड़ा है. इस रथ में गांधी का वह संदेश लिखा हुआ है, जो उन्होंने चंपारण सत्याग्रह के दौरान 18 अप्रैल 1917 को अनुमंडल दंडाधिकार, मोतिहारी सदर के इलजास में दिया था. रथ के होर्डिंग में यह संदेश […]

लापरवाही . मुंगेर के डीएम ने हरी झंडी दिखा रथ को किया रवाना

रवाना रथ नजारत परिसर में खड़ा है. इस रथ में गांधी का वह संदेश लिखा हुआ है, जो उन्होंने चंपारण सत्याग्रह के दौरान 18 अप्रैल 1917 को अनुमंडल दंडाधिकार, मोतिहारी सदर के इलजास में दिया था. रथ के होर्डिंग में यह संदेश गलत अंकित है.
मुंगेर : चंपारण सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरे होने पर पूरे राज्य में जहां आयोजनों की धूम है, वहीं दूसरी ओर गांधी के संदेश से लोगों को वाकिफ कराने के लिए सरकारी स्तर पर गांधी रथ के भ्रमण का भी कार्यक्रम तय किया गया है. यह रथ गांव-गांव व नगर के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करेगा. मुंगेर के डीएम उदय कुमार सिंह ने सोमवार को हरी झंडी दिखा कर रथ को तो रवाना कर दिया, लेकिन यह रथ उसके बाद नजारत परिसर में खड है. इस रथ में गांधी का वह संदेश लिखा हुआ है जो उन्होंने चंपारण सत्याग्रह के दौरान 18 अप्रैल 1917 को अनुमंडल दंडाधिकार, मोतिहारी सदर के इलजास में दिया था. रथ के होर्डिंग में यह संदेश गलत अंकित है.
गांधी की दो पुस्तकें सत्य के प्रयोग और उनकी आत्मकथा में उनका संदेश यूं लिखा है. ”आप मुझे जो सजा देना चाहते हैं, उसे कम करने की भावना से बयान नहीं दे रहा हूं. मुझे तो यही जता देना है कि कानून द्वारा स्थापित सरकार का अपमान करना नहीं है, बल्कि मेरा हृदय जिस अधिक बड़े कानून अर्थात अंतरात्मा की आवाज को स्वीकार करता है, उसका अनुशरण करना ही मेरा उद्देश्य है ”. लेकिन सरकार द्वारा जो गांधी रथ निकाला गया है उसके होर्डिंग में अंकित संदेश है … ” मैं यह वक्तव्य इसलिए नहीं दे रहा हूं कि मुझे जो सजा दी जानेवाली है उसमें कमी की जाय बल्कि यह दिखाने को दे रहा हूं मैंने आदेश का उल्लंघन वैद्य सत्ता के प्रति आदर के अभाववश नहीं, बल्कि अपनी अंतरात्मा की आवाज जो हमारे अस्तित्व का सर्वोच्च नियामक है , उसके …” यह संदेश एक तो पूर्ण नहीं है और इसमें जिस वैद्य शब्द का उपयोग किया गया है, उसका अर्थ रोगी का इलाज करने वाला वैद्य होता है. साथ ही यह गांधी जी के मूल कथन से भिन्न है.
रथ में लिखे गलत संदेश से यहां के बुद्धिजीवी खासे नाराज हैं. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के एनएसएस के पूर्व प्रभारी प्रो जयप्रकाश नारायण का कहना है कि सरकारी स्तर पर इस तरह की गलती से खास कर छात्र दिगभ्रमित हो रहे हैं. साहित्यकार शिवनंदन सलिल ने कहा कि रथ घुमाने से गांधीवाद का प्रचार नहीं होगा. दरअसल उनका जीवन ही उनका संदेश है. आज के हिंसा के दौर में युवा पीढ़ी को अहिंसक विचारधारा से कैसे लैस किया जाये यह बड़ी चुनौती है. उससे भी बड़ी चुनौती ढांचागत हिंसा की है. जहां अंतिम आदमी कदम-कदम पर धक्का खा रहा है. हद तो यह है कि गांधी के विचारों पर आधारित निकाले गये गांधी रथ में छपे संदेश पूर्ण नहीं हैं, जबकि अशुद्धि संदेश में काला टीका साबित हो रहा है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >