हेड इंज्युरी के मरीजों को होती है परेशानी
मुंगेर : नये वित्तीय वर्ष में सदर असपताल के भवन को मॉडल बनाने की कवायद आरंभ हो गयी है़ किंतु छह जिले का प्रमंडलीय मुख्यालय मुंगेर के सदर अस्पताल में आज तक सीटी स्कैन की व्यवस्था नहीं हो पायी है़ इस कारण जिले की 15 लाख आबादी को सीटी स्कैन की जरूत पड़ने पर भागलपुर या पटना की ओर रूख करना पड़ा है़
सीटी स्कैन की नहीं है सुविधा: सदर अस्पताल में आइसीयू सेवा तो आरंभ कर दी गयी़ किंतु आज तक यहां सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पायी है़ मालूम हो कि सीटी स्कैन जांच काफी महंगा जांच है़ इसके लिए गरीब तबके के मरीज सक्षम नहीं हो पाते हैं. वहीं संपन्न लोगों को भी इस सेवा के लिए भागलपुर या पटना जाना पड़ता है़ सीटी स्कैन के लिए जिले से बाहर जाने के चक्कर में मरीजों के इलाज में काफी विलंब हो जाती है, जो कि मरीजों के लिए कभी- कभी घातक सिद्ध होता है़
सीटी स्कैन के लिए जाना पड़ता है बाहर: सदर अस्पताल से मिली रिपोर्ट के अनुसार हर साल अलग- अलग दुर्घटनाओं में लगभग 200 से अधिक हेडइंजुरी के मरीज पाये जाते हैं, जिन्हें सीटी स्कैन की जरूरत पड़ जाती है़ इसके अलावा भी अन्य मामलों में भी दर्जनों मरीज को सीटी स्कैन करवाने की जरूरत पड़ती है़ ऐसी हालत में मरीजों को भागलपुर या पटना जाना पड़ जाता है़ यदि सदर अस्पताल में ही इसकी व्यवस्था हो जाये तो फिर मरीजों के इलाज आरंभ होने में दकरी नहीं होगी़
जिले की 15 लाख आबादी सीटी स्कैन के लिए जाती है बाहर
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फिलहाल सीटी स्कैन के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं दी गयी है़ स्वास्थ्य विभाग से इसके लिए अलग से कोई फंड भी आवंटित नहीं की गयी है़
