जुगाड़ वाहन पर ब्रेक नहीं

लापरवाही. धुआं व ध्वनि प्रदूषण के अलावा दुर्घटना का जुगाड़ बगैर किसी लाइसेंस के सड़कों पर दौड़ती जुगाड़ गाड़ी प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है. कोर्ट के आदेश के बावजूद इसे बंद नहीं किया जा रहा है. मुंगेर : न लाइसेंस, न रोड परमिट, न कोई टैक्स और न ही कोई ड्राइविंग लाइसेंस फिर भी […]

लापरवाही. धुआं व ध्वनि प्रदूषण के अलावा दुर्घटना का जुगाड़

बगैर किसी लाइसेंस के सड़कों पर दौड़ती जुगाड़ गाड़ी प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है. कोर्ट के आदेश के बावजूद इसे बंद नहीं किया जा रहा है.
मुंगेर : न लाइसेंस, न रोड परमिट, न कोई टैक्स और न ही कोई ड्राइविंग लाइसेंस फिर भी मजे से 2-4 टन सामान लाद कर जहरीला धुआं छोड़ती जुगाड़ गाड़ी जिले की सड़कों पर फर्राटा मार रही है. इससे सरकार को जहां नकद नुकसान हो रहा है. वहीं वायु और ध्वनि प्रदूषण लोगों को मुफ्त में खतरनाक बीमारियां भी बांट रही है. जबकि सुप्रीम कोर्ट व राज्य परिवहन आयुक्त ने सभी जिला के जिलाधिकारी व डीटीओ को पत्र भेज कर जुगाड़ वाहन के परिचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है.
50 से 60 हजार में तैयार हो जाती है जुगाड़ गाड़ी
टायर वाले पहिये और उसमें जेनेरेटर फिट कर, डीजल डाल कर धूं-धूं धुंआ छोड़ती गाड़ियां ही जुगाड़ हैं. इस जुगाड़ का अविष्कार पश्चिम बंगाल में हुआ और यह धीरे-धीरे बिहार-झारखंड के प्रायः सभी शहरों व गांवों में फैल गया. इसको तैयार करने में मुश्किल से 50 से 60 हजार रुपये खर्च होता है. इस पर लगी लागत दो से तीन महीने में वसूल हो जाता है. जाहिर है इस जुगाड़ की वजह से साइकिल ठेले के दिन लद गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस पर किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं है. इस ओर झुकाव का मुख्य कारण है कि इसके परिचालन पर न ही लाइसेंस और ना ही कोई फ़ीस भरने की जरूरत है. सरकार को कुछ देना नहीं होता है और जो कमाया वह खुद का हो जाता है.
रोक के बावजूद चल रहा जुगाड़
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य परिवहन आयुक्त ने भी एक पत्र जारी किया. पत्र के आधार पर एक बड़ा फैसला लिया गया. इसके अनुसार जिले में सभी प्रकार के जुगाड़ गाड़ी जो डीजल पंप सेट, मोटर साईकिल हैंडल, माल ढोने वाला रिक्शा-ठेला के समायोजन द्वारा निर्मित है. इस तरह के जुगाड़ गाड़ी से क्रमशः अवैध रूप से परिचालन और व्यवसायिक सामान गिट्टी, सीमेंट, लकड़ी के अलावा रोज अलग-अलग सामान को ढोने उपयोग कर रहे हैं. इस तरह के वाहन मोटर वाहन अधिनियम 1988 बिहार मोटर नियमावली 1992 और केन्द्रीय मोटर नियमावली 1989 के किसी भी मानको को पूरा नहीं करता है.
इस तरह के वाहनों के प्रोटोटाइप की भी मंजूरी नहीं मिलती है. जिसके कारण इन वाहनों का निबंधन, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं मिलता है. इस स्थिति में दुर्घटना के फलस्वरूप यात्री और वाहन को क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया जा सकता है. विभाग ने सभी आरटीए, डीटीओ, एमवीआइ व प्रवर्तन अवर निरीक्षकों को जुगाड़ गाड़ी के परिचालन पर रोक लगाने को कहा है. लेकिन मुंगेर जिला प्रशासन द्वारा जुगाड़ गाड़ी के परिचालन पर रोक लगाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है और धड़ल्ले से ऐसा वाहन जहरीला धुंआ उगलते हुए सड़कों पर दोड़ लगा रही है.
पर्यावरण हो रहा प्रदूषित
जुगाड़ गाड़ी से निकलने वाली धुआं वायु और ध्वनि प्रदूषण लोगों को मुफ्त में खतरनाक बीमारियां भी बांट रही है. पर्यावरण के जानकार बताते हैं कि जुगाड़ गाड़ी दूसरे वाहनों की तुलना में 14 गुणा ज्यादा कार्बन मोनो आक्साइड छोड़ती है जो पर्यावरण और जिंदगी दोनों के लिए बहुत खतरनाक है. आलम यह है कि अगर जुगाड़ गाड़ी आपके बगल से निकल जाय तो एक बार सांस लेना मुश्किल हो जाता है.
कहते हैं जिला परिवहन पदाधिकारी
जिला परिवहन पदाधिकारी मो. नजीर अहमद ने कहा कि अभी तक विभाग को राज्य परिवहन आयुक्त का कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है. अगर आदेश प्राप्त होता है तो जुगाड़ गाड़ी परिचालन के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाया जायेगा.
कोर्ट व राज्य परिवहन आयुक्त का निर्देश टांय-टांय फिस्स
राजस्व का हो रहा बड़ा नुकसान
जुगाड़ गाड़ी मोटर वाहन नियम में वर्णित वाहनों के मानक को पूरा नहीं करता है. इस वजह से ऐसे वाहनों का निबंधन, परमिट, बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं बनाया जाता है. इतना ही नहीं जुगाड़ वाहन के चालक को ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होता है. किसी प्रकार का टेक्स भी भुगतान नहीं किया जाता है. जिससे सरकार को भारी राजस्व की क्षति हो रही है. जिले में 2000 से अधिक जुगाड़ वाहन का परिचालन होता है. अक्सर दुर्घटना भी होती है और लोग जान भी गंवा बैठते हैं. अगर किसी प्रकार की दुर्घटना होने पर प्रभावित व्यक्ति या वाहन के क्षतिपूर्ति दावे का भुगतान नहीं किया जाता है. इस तरह के वाहनों का परिचालन दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है.

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