बिना गैस का फायर सेफ्टी सिलिंडर

सदर अस्पताल. अग्निशामक के नाम पर धोखा, कई सिलिंडर मिले खाली सदर अस्पताल में अग्निशामक संयंत्र के नाम पर भारी अनियमितता बरती जा रही है. अस्पताल के विभिन्न वार्डों व कार्यालयों में दो दर्जन स्थानों पर लगे फायर सेफ्टी सिलिंडर में गैस है ही नहीं जो आग लगने पर उसे बुझा सकें. जबकि इस सिलिंडर […]

सदर अस्पताल. अग्निशामक के नाम पर धोखा, कई सिलिंडर मिले खाली

सदर अस्पताल में अग्निशामक संयंत्र के नाम पर भारी अनियमितता बरती जा रही है. अस्पताल के विभिन्न वार्डों व कार्यालयों में दो दर्जन स्थानों पर लगे फायर सेफ्टी सिलिंडर में गैस है ही नहीं जो आग लगने पर उसे बुझा सकें. जबकि इस सिलिंडर की रिफिलिंग दिसंबर 2016 में कराया गयी और दिसंबर 2017 तक इसकी अवधि निर्धारित है. रिफिलिंग के नाम पर लाखों रुपये की निकासी भी की गयी है. अलबत्ता यह कि सभी सिलिंडर पर रिफिलिंग का स्टीकर भी लगा है. इस पर अस्पताल उपाधीक्षक का दस्तखत व मुहर अंकित है.
मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग में जहां अराजकता की स्थिति है और कुव्यवस्था कायम है. वहीं दूसरी ओर रोगी व कर्मियों के सुरक्षा व संरक्षा के मामले में भारी अनियमितता बरती जा रही है. यहां तक कि अग्निशमन संयंत्र के रिफिलिंग के नाम पर लाखों रुपये की अवैध निकासी कर ली गयी है और संयंत्र बिना गैस का ही अस्पताल परिसर में टंगा है. आश्चर्य तो यह है कि बिना गैस वाले सिलिंडर पर भी रिफिलिंग का स्टीकर लगा है और उस स्टीकर पर अस्पताल उपाधीक्ष का दस्तखत व मुहर भी अंकित है. जो यह प्रमाणित करता है कि यहां व्यापक स्तर पर वित्तीय धांधली हो रही है.
परीक्षण के दौरान पाये गये कई खाली सिलिंडर
सदर अस्पताल के महिला मेडिकल वार्ड में एक स्वास्थ्य कर्मी द्वारा फायर सेफ्टी सिलिंडर का परीक्षण किया गया़ किंतु परीक्षण के दौरान सिलेंडर से गैस नहीं निकली़ इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी ने महिला सर्जिकल वार्ड में लगे सिलिंडर का भी परीक्षण किया़ किंतु उससे भी गैस नहीं निकला़ ऐसा देख ब्लड बैंक के कर्मियों ने भी रक्त अधिकोष में लगे सिलेंडर का परीक्षण किया़ किंतु परीक्षण के दौरान सिलिंडर से रत्ती भर भी गैस नहीं निकला़ इतना होते ही इस बात की जानकारी अस्पताल प्रबंधक तौसिफ हसनैन को दी गयी़ उन्होंने पहले तो इस बात को स्वीकार ही नहीं किया. किंतु मामला को तूल पकड़ता देख उन्होंने एक स्वास्थ्य कर्मी से पुरुष सर्जिकल वार्ड के सिलिंडर का परीक्षण करवाया, जिससे काफी प्रयास के बावजूद भी गैस नहीं निकला़ इसके बाद अस्पताल प्रबंधक ने कहा कि इस संबंध में फायर सिक्युरिटी एजेंसी से बात की जायेगी.
70 दिन बाद भी नहीं हुआ डेमोंस्ट्रेशन
वैसे तो सदर अस्पताल में लगे फायर सेफ्टी सिलिंडर का रिफिलिंग फरवरी 2016 में ही किया जाना था़ किंतु अस्पताल प्रबंधन इस संबंध में पूरी तरह उदासीन बनी रही़ प्रभात खबर द्वारा इस मामले को लेकर लगातार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया़ जिसके बाद पिछले फरवरी माह में सभी फायर सेफ्टी सिलिडर पर मीनैक्स फायर सेक्यूरिटी एजेंसी के मुंगेर शाखा की परची चिपका दी गयी़ जिस पर सिलिंडर की रिफिलिंग की तिथि 22 दिसंबर 2016 अंकित है़ वहीं सिलेंडर रिफिलिंग की अगली निर्धारित तिथि 21 दिसंबर 2017 अंकित है़ अर्थात एक साल तक यह सिलिंडर आग बुझाने में सक्षम है. लेकिन जिस एजेंसी ने पुराने सिलिंडर में गैस की रिफिलंग की उसका अबतक डेमोस्ट्रेशन भी नहीं किया गया है. जबकि नियमानुकूल गैस भरने के बाद उसका डेमोस्ट्रेशन तत्काल किया जाना है.
फायर सेफ्टी की हो रही है अनदेखी
अस्पताल के विभिन्न वार्डों में फायर सेफ्टी सिलिंडर लगाये जाने का मुख्य उद्देश्य है कि अगलगी की घटना के दौरान आग पर त्वरित काबू पाने में अधिक परेशानी न हो़ किंतु सदर अस्पताल में शायद इस उद्दश्य के कोई मायने नहीं रखे जा रहे़ मालूम हो कि वर्ष 2016 में कोलकाता के एमआरआई अस्पताल में हुई अगलगी की घटना से 89 लोगों की मौत हो गयी थी़ वहीं उड़ीसा के भुवनेश्वर स्थित सम अस्पताल में पिछले साल ही हुई अगलगी की घटना में 23 मरीजों की जानें गयी़ किंतु इस घटना के बाद भी सदर अस्पताल मुंगेर सीख लेना नहीं चाह रही़
कहते हैं अस्पताल प्रबंधक
सदर अस्पताल में लगे सभी फायर संयंत्र की रिफिलिंग दिसंबर 2016 में की गयी है जो दिसंबर 2017 तक काम करेगा. जिस सिलिंडर से गैस नहीं निकला है उसके संदर्भ में संबंधित एजेंसी को पत्र लिखा जायेगा.
-तौसिफ हसनैन, अस्पताल प्रबंधक
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल में कुल 35 फायर सेफ्टी सिलेंडर लगाये गये हैं. उन्हें यह पता नहीं है कि कितने सिलेंडर में गैस भरे हैं या खाली पड़े हुए हैं. इसके बारे में विशेष जानकारी अस्पताल प्रबंधक ही दे सकते हैं.
-डॉ राकेश कुमार सिन्हा, अस्पताल उपाधीक्षक

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