मुंगेर : सदर अस्पताल में मेडिकल कचरे के बीच रोगियों का इलाज किया जा रहा है. मेडिकल कचरा मनुष्य के लिए काफी खतरनाक माना जाता है. इसे नष्ट करने व रीसाइकिल के संदर्भ में अनेक प्रावधान किये गये हैं. लेकिन मुंगेर सदर अस्पताल में ऐसा नहीं हो रहा. स्वास्थ्य महकमा अस्पताल की व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दे रहा और स्थिति बद से बदतर होती जा रही है.
मेडिकल कचरे के बीच रोगियों का इलाज
मुंगेर : सदर अस्पताल में मेडिकल कचरे के बीच रोगियों का इलाज किया जा रहा है. मेडिकल कचरा मनुष्य के लिए काफी खतरनाक माना जाता है. इसे नष्ट करने व रीसाइकिल के संदर्भ में अनेक प्रावधान किये गये हैं. लेकिन मुंगेर सदर अस्पताल में ऐसा नहीं हो रहा. स्वास्थ्य महकमा अस्पताल की व्यवस्था पर कोई […]

सदर अस्पताल प्रबंधन के कुव्यवस्थओं के कारण इन दिनों चिकित्कीय व्यवस्था पूरी तरह शर्मसार हो रही है़ यहां मरीजों के स्वास्थ्य के साथ इलाज के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है़ चिकित्सकीय व्यवस्था पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरा के नाम पर हजारों रुपये खर्च किये गये़ बावजूद अस्पताल प्रबंधन को शायद कुव्यवस्थाएं दिखायी नहीं पड़ रही़ हाल यह है कि इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीज को मेडिकल कचरे के डिब्बे में झोंका जा रहा है़ जो न सिर्फ मरीज को संक्रमण का शिकार बना सकता है, बल्कि यह व्यवस्था मरीज की जान तक ले सकती है़
कचरे के डिब्बे के बीच हो रहा इलाज : जो लोग प्वाइजनिंग के शिकार हो गये हों, उनके परिजन सावधान हो जाये़ं ऐसे मरीजों को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाने का मतलब उसे इलाज के नाम पर संक्रमण करने की पूरी व्यवस्था है. बुधवार को शहर के लल्लू पोखर निवासी विनोद प्रसाद के 16 वर्षीय पुत्र ने गलती से कीटनाशक दवा खा लिया़ जिसे परिजनों ने इलाज के लिए सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भरती कराया़ किंतु वहां पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीज का इलाज करने के लिए पुराने इमरजेंसी वार्ड में सीमेंट की बनी बेंच पर लिटा दिया. जहां मरीज के मुंह के पास मेडिकल कचरे का एक बड़ा सा डस्टबीन रखा था. मरीज के पेट से विषैला पानी निकालने के लिए नाक में एक छोटी सी पाइप लगा कर पाइप को कचरे के डब्बे में डाल दिया गया़ मालूम हो कि कचरे के डब्बे में विभिन्न मरीजों के लिए इस्तेमाल की गयी इंजेक्शन, भाइल, रूई-पट्टी सहित अन्य संक्रामक मेडिकल कचरे भरे पड़े थे़ इसका संक्रमण इलाजरत मरीजों को भी हो सकता है़
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नहीं है़ इस संबंध में वे इमरजेंसी के स्वास्थ्य कर्मियों से बात करेंगे़
सदर अस्पताल में चिकित्सकीय मानकों का पालन नहीं
बेखबर है अस्पताल प्रबंधन
सदर अस्पताल में कुव्यवस्थाओं का डेरा है, इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है़ जिसे ध्यान में रखते हुए अस्पताल में कुल आठ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया है़ जिसमें पुराना इमरजेंसी वार्ड भी एक है़ सभी कैमरे का डिसप्ले अस्पताल उपाधीक्षक कार्यालय में होता है़ किंतु अस्पताल उपाधीक्षक व्याप्त कुव्यवस्थाओं से पूरी तरह अंजान बने रहते हैं. ऐसे में हजारों रुपये का खर्च कर सीसीटीवी कैमरे का लगाया जाना नाहक साबित हो रहा है़