मात्र 163 बच्चों का हुआ इलाज

विभागीय उदासीनता. क्षतिग्रस्त भवन में चल रहा पोषण पुनर्वास केंद्र सदर अस्पताल स्थित महिला मेडिकल वार्ड के दूसरी मंजिल पर चल रहे एनआरसी के संचालन का अब एक साल पूरा हो चुका है. पिछले एक साल में यहां मात्र 163 कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भरती किया गया, जबकि जिले भर में कुपोषितों की […]

विभागीय उदासीनता. क्षतिग्रस्त भवन में चल रहा पोषण पुनर्वास केंद्र

सदर अस्पताल स्थित महिला मेडिकल वार्ड के दूसरी मंजिल पर चल रहे एनआरसी के संचालन का अब एक साल पूरा हो चुका है. पिछले एक साल में यहां मात्र 163 कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भरती किया गया, जबकि जिले भर में कुपोषितों की संख्या हजारों में है़
मुंगेर : पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के नाम पर महज खानापूर्ति किया जा रहा है़ एक ओर जहां पुराने क्षतिग्रस्त भवन में संचालित केंद्र कभी भी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है़ वहीं दूसरी ओर पिछले एक साल में मात्र 163 कुपोषितों को ही भरती किया गया है, जो कम है़ इतना ही नहीं यहां पर न तो मनोरंज के कोई साधन हैं और न ही बच्चों को मेनू के अनुसार भोजन ही उपलब्ध कराया जा रहा है़
एनआरसी के नाम पर हो रही खानापूर्ति
सदर अस्पताल स्थित महिला मेडिकल वार्ड के दूसरे मंजिल पर चल रहे एनआरसी के पुनरसंचालन का अब एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन यह जान कर आश्चर्य होगा कि पिछले एक साल में यहां मात्र 163 कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भरती किया गया, जबकि जिले भर में कुपोषितों की संख्या हजारों में है़ कहने को तो एनआरसी में 20 बेड लगाये गये हैं, लेकिन यहां पर कभी भी सभी बेड नहीं भर पाते हैं. जबकि उसके देखरेख के लिए यहां छह एएनएम, एक फिडिंग डेमोस्ट्रेटर तथा एक रसोइया को पदस्थापित किया गया है़.
न मनोरंजन का साधन और न मेनू का पालन
एनआरसी में इलाज के लिए पहुंचने वाले कुपोषित बच्चों के माताओं के मनोरंजन का कोई साधन नहीं है़ यहां पर एक टीवी काफी लंबे समय से बंद पड़ी हुई है तथा डीवीडी भी खराब पड़ा हुआ है़ इसके कारण माताओं को ज्ञानवर्धक जानकारियों वाला बीडीओ भी नहीं दिखाया जाता है़ वहीं बच्चों को मेनू के अनुसार आहार भी उपलब्ध नहीं कराये जाते हैं. जो यहां की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
पिछले एक साल में भरती हुए बच्चे
महीना बच्चों की संख्या
मार्च 2016 6
अप्रैल ” 6
मई ” 20
जून ” 16
जुलाई ” 24
अगस्त ” 28
सितंबर ” 17
अक्टूबर ” 6
नवंबर ” 11
दिसंबर ” 11
जनवरी 2017 7
फरवरी ” 11
कभी भी हो सकता है हादसा
जिस भवन में एनआरसी का संचालन किया जा रहा है़ वह पुराना होने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त भी हो चुका है़ बावजूद इस भवन में मासूमों के जिंदगी की अहमियत को ताक पर रख कर एनआरसी का संचालन किया जा रहा है़ वर्ष 2015 में कई बार आये भूकंप के झटकों से भवन क्षतिग्रस्त हो गया है.जिसमें केंद्र का संचालन खतरनाक साबित हो सकता है़ अगर यही हाल रहा तो किसी दिन यह क्षतिग्रस्त भवन एक बड़े हादसे का गवाह भी बन सकता है़
पोषण पुनर्वास केंद्र पर वैसे बच्चों को भरती कर इलाज किये जाने का प्रावधान है, जो शारीरिक रूप से कुपोषित हों. ऐसे बच्चों को संबंधित क्षेत्र की आशा द्वारा एनआरसी लाया जाना है. जिसे प्रति बच्चा 100 रुपये की दर से प्रोत्साहन राशि दिया जाता है. वहीं अपने शिशु के साथ रहने वाली माताओं को भी प्रतिदिन के हिसाब से 50 रुपये भुगतान किया जाना तय है़ स्वास्थ्य विभाग की यह मंशा है कि जो बच्चे कुपोषित हैं, उसे जरूरत के अनुसार एक सप्ताह से 21 दिनों तक रख कर इलाज किया जाय, लेकिन जिला स्वास्थ्य समिति शायद इस दिशा में उदासीन बनी हुई है़ इसके कारण एनआरसी पर पहुंचने वाले कुपोषित बच्चों की संख्या कम चल रही है़

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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