फर्जी सिम कारोबारी पर कसेगी नकेल

मुंगेर : फर्जी सिम के सुनियोजित व संगठित कारोबार के तहत जिले में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ व्यापक पैमाने पर खिलवाड़ हो रहा है. हर रोज औसतन सैकड़ों सिम कार्ड फर्जी आईडी पर एक्टिवेट कर बाजार में बेचे जा रहे. इस गोरखधंधे में लिप्त कारोबारियों द्वारा गैर कानूनी तरीके से थोड़े पैसों की लालच में […]

मुंगेर : फर्जी सिम के सुनियोजित व संगठित कारोबार के तहत जिले में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ व्यापक पैमाने पर खिलवाड़ हो रहा है. हर रोज औसतन सैकड़ों सिम कार्ड फर्जी आईडी पर एक्टिवेट कर बाजार में बेचे जा रहे. इस गोरखधंधे में लिप्त कारोबारियों द्वारा गैर कानूनी तरीके से थोड़े पैसों की लालच में सिम अपराधियों के हाथों तक पहुंच रहा है. जिसका उपयोग अपराधी रंगदारी मांगने, धमकी देने एवं अपराध को संचालित करने में करता है. लेकिन अब मुंगेर पुलिस फर्जी सिम कारोबारियों पर नकेल कसने की तैयारी में है.

पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने बताया कि अधिकांश अपराधी दुकानदारों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज के आधार पर सिम खरीदता है. इतना ही नहीं दुकानदारों द्वारा भी पैसों के लालच में फ्री एक्टीभेट सिम अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता है. जिसके माध्यम से अपराधी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं. कई कांडों के अनुंसाधन में ये बाते सामने आयी है. उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण एवं राष्ट्रीय
सुरक्षा को ख्याल में रखते हुए सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसे मामलों में दर्ज कांडों का अनुंसाधन पूरी ईमानदारी से करें और अपराधी ने कहां से सिम प्राप्त किया इसकी जांच करें. पहले रंगदारी मामले में अपराधियों के पास से पकड़े गये सिम एवं रंगदारी मांगने में उपयोग किये गये नंबर पर सिम की जानकारी ले. सत्यापन कर दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाये.
कैसे होता है कारोबार : डिस्ट्रीब्यूटर व रिटेलर निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने एवं कंपनी द्वारा दिये जाने वाले गिफ्ट के चक्कर में फर्जी सिमों का कारोबार धड़ल्ले से कर रहा है. यह फर्जीवाड़ा वितरकों, रिटेलरों व कंपनी के अधिकारियों के मिलीभगत से फलफूल रहा है. वितरकों और रिटेलरों के माध्यम से फर्जी डेमो सिम बनाकर जिसमें किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो और कोई फर्जी नाम व पता का कागजात पर डेमो सिम चालू की जाती है. इस फर्जी डेमो से सैकड़ों की संख्या में फर्जी कागजात लगाकर नंबर चालू किया जाता है जो शहर में रिटेलरों के माध्यम से बिना आईडी प्रूफ के बिकते रहते हैं. इतना ही नहीं जो व्यक्ति सिम लेने के लिए दस्तावेज देते हैं. उसकी फोटो कॉपी कर दूसरा तीसरा सिम भी दुकानदारों द्वारा इशू कर लिया जाता है. इसमें कौन सा व्यक्ति यह सिम चला रहा है इसका कोई आधार नहीं होता. फर्जी सिमों से ज्यादातर महिलाओं को परेशान करने के साथ ही अन्य गैर कानूनी कार्य किया जाता है. इस कारण आपराधिक गतिविधि में पकड़े गये सिम को सत्यापित करने में पुलिस का पसीना छूट जाता है.

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