92 साल पहले मलबे में तब्दील मुंगेर आज लिख रहा प्रगति की नयी इबारत

92 साल पहले मलबे में तब्दील मुंगेर आज लिख रहा प्रगति की नयी इबारत

15 जनवरी 1934 की उस डरावनी दोपहर को याद कर आज भी सिहर उठते हैं लोग, आधुनिक टाउनशिप के रूप में उभरी योग नगरी

मुंगेर. इतिहास के पन्नों में 15 जनवरी का दिन मुंगेर के लिए किसी काले अध्याय से कम नहीं है. वर्ष 1934 में आज ही के दिन आए विनाशकारी भूकंप ने इस ऐतिहासिक शहर को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था. लेकिन ””गिरकर संभलने”” की जिजीविषा ने आज 2026 के मुंगेर को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. कल की त्रासदी को पीछे छोड़ यह योग नगरी आज शिक्षा, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना रही है.

जब धरती फटी और थम गयी थी जिंदगी की रफ्तार

मकर संक्रांति का त्योहार आते ही बुजुर्गों के जेहन में वह डरावनी यादें ताजा हो जाती हैं. 15 जनवरी 1934 की दोपहर जब भूकंप आया, तो देखते ही देखते पूरा शहर जमींदोज हो गया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस प्रलय में लगभग 1434 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. खेतों में दरारें पड़ गई थीं और चारों ओर सिर्फ हाहाकार था. आज उस मंजर को बताने वाले चश्मदीद तो नहीं बचे, लेकिन पूर्वजों से सुनी वो कहानियां आज भी शरीर में सिहरन पैदा कर देती हैं.

बापू और नेहरू ने अपने हाथों में उठाई थी कुदाल

मुंगेर की इस भीषण आपदा ने समूचे राष्ट्र को झकझोर दिया था. राहत कार्य के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, और डॉ. संपूर्णानंद जैसे दिग्गज मुंगेर पहुंचे थे. इन महापुरुषों ने खुद कुदाल और डलिया उठाकर मलबा साफ करने में मदद की थी. इनके अलावा पंडित मदन मोहन मालवीय, सरोजनी नायडू और खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे नेताओं ने भी यहां पहुंचकर मानवता की सेवा की मिसाल पेश की थी.

चौराहों का शहर और आधुनिक टाउनशिप

आज का मुंगेर मूलतः उस विनाश के बाद बसाया गया एक आधुनिक टाउनशिप है. पुनर्निर्माण के दौरान शहर को इस तरह व्यवस्थित किया गया कि यहां चौड़ी सड़कें और हर आठ-दस घरों के बाद एक चौराहा बनाया गया. यही कारण है कि मुंगेर को ””चौराहों का शहर”” भी कहा जाता है. आज का मुंगेर पूरी तरह आधुनिक और योजनाबद्ध तरीके से विकसित है.

विकास की नयी गाथा गढ़ रही योग नगरी

त्रासदी के घावों को भरकर मुंगेर अब प्रगति पथ पर अग्रसर है. एक तरफ जहां विश्व प्रसिद्ध बिहार स्कूल ऑफ योगा पूरी दुनिया को योग की शिक्षा दे रहा है, वहीं खानकाह रहमानी शिक्षा का अलख जगा रही है. देश का दूसरा और बिहार का पहला वानिकी कॉलेज भी इसी धरती की शान बढ़ा रहा है. मुंगेर ने साबित कर दिया है कि हौसले बुलंद हों, तो मलबे से भी भव्य भविष्य का निर्माण किया जा सकता है.

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मुंगेर में कब-कब आये थे तेज भूकंप

तिथि तीव्रता

07 अक्तूबर 1920 5.5

15 जनवरी 1934 8.4

11 जनवरी 1962 6.0

21 अगस्त 1988 6.7

18 सितंबर 2011 5.7

25 अप्रैल 2015 7.9

28 अप्रैल 2015 6.8

4 जनवरी 2016 6.9

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Published by: Birendra kumar sing

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