कंकड़ घाट में ध्वस्त सीढ़ी.
थोड़ी सी चूक किसी बड़ी घटना को दे सकता है अंजाम
मुंगेर : नहायखाय व कद्दू भात के साथ ही शुक्रवार से तीन दिवसीय महापर्व छठ का अनुष्ठान प्रारंभ हो गया. लेकिन शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों घाट खतरनाक है. जहां छठ पर्व करना व्रतियों के लिए खतरों से खाली नहीं है. अर्ध दान करने में भी भक्तों से थोड़ी चूक हुई तो वह जीवन और मरन का सवाल बन जायेगा.
छठ पर्व को लेकर चारों ओर उत्साह का माहौल है. जबकि घाटों को लेकर लोग परेशान हैं. प्रशासनिक फोकस शहर के तीन प्रमुख घाट सोझी घाट, बबुआ घाट एवं कष्टहरणी घाट है. जहां सफाई, रोशनी से लेकर गंगा में बेरिकेटिंग की व्यवस्था की जा रही है. जबकि इन घाटों से अधिक की संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के गंगा घाटों पर छठ पर्व को लेकर भीड़ उमड़ती है. जहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है.
शहरी क्षेत्र के घाट खतरनाक: शहर के कंकड़ घाट की सीढ़ीयां पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है जो काफी खतरनाक है. जबकि लाल रदवाजा घाट पर पानी की गहराई अधिक है. बेलवा घाट, दोमंठा घाट के कुछ स्थानों पर दलदली है और अधिकांश भागों में पानी की गहराई अधिक है. कहा जा रहा है कि कष्टहरणी घाट के कुछ हिस्सों में दलदली है जो जानलेवा हो सकती है.
ग्रामीण क्षेत्र के घाटों की स्थिति बदहाल
शहरी क्षेत्र से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों के घाटों पर छठव्रतियों एवं श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. मुंगेर सीमा के हेमजापुर से लेकर बरियारपुर घोरघट तक उत्तरवाहिनी गंगा बहती है. गंगा किनारे दर्जनों घाट है जहां ग्रामीण क्षेत्रों के लोग छठ पर्व मनाते हैं जो काफी खतरनाक है. हेमजापुर, सिघिंया, पड़हम में घाट से एक-दो हाथ पर ही पानी गहरा है. जबकि दलदली भी है. जबकि सदर प्रखंड के शंकरपुर, मय एवं तोफिर घाट पूरी तरह से कटाव की चपेट में है. जहां छठ पर्व मनाना खतरों से खाली नहीं है. दरियापुर, शिवगंज, शीतलपुर, बरदह, डीह घाट की स्थिति भी दयनीय है. जहां थोड़ी सी चूक बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है.
कहते हैं अधिकारी
एसडीओ डॉ कुंदन कुमार ने कहा कि देहाती क्षेत्र शंकरपुर, मय एवं तौफिर घाट की स्थिति नाजुक है. स्थानीय बीडीओ को निर्देश दिया गया है कि वे स्थल निरीक्षण कर घाटों पर बेरिकेटिंग की व्यवस्था करें और लोगों से चयनित घाटों पर ही पर्व करने की अपील करें.
