...तो गंदगी के बीच मनायेंगे छठ

उदासीनता. गंगा घाटों पर स्वच्छता अभियान की निकल रही हवा कल से छठ का अनुष्ठान शुरू हो रहा है. पर्व से पूर्व गंगा स्नान के लिए व्रती आ रही हैं. उन्हें घाटों पर खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हर अोर गंदगी है. घाट की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है. कपड़े बदलने की […]

उदासीनता. गंगा घाटों पर स्वच्छता अभियान की निकल रही हवा

कल से छठ का अनुष्ठान शुरू हो रहा है. पर्व से पूर्व गंगा स्नान के लिए व्रती आ रही हैं. उन्हें घाटों पर खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हर अोर गंदगी है. घाट की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है. कपड़े बदलने की जगह नहीं है. शौच की कोई व्यवस्था नहीं है. बबुआ घाट पर बना सामुदायिक शौचालय बदहाल है. नगर प्रशासन को इस अोर ध्यान देने की जरूरत है.
मुंगेर : पूरे देश में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है और नमामि गंगे जैसे योजना के माध्यम से गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण व उसे स्वच्छ-निर्मल बनाने का कार्य चल रहा. दूसरी ओर मुंगेर के विभिन्न गंगा घाटों पर शौचालय तक की समुचित व्यवस्था नहीं है. पूर्व में बने कष्टहरणी घाट व बबुआ घाट का शौचालय पूर्णत: ध्वस्त हो चुका है. जबकि सोझीघाट सहित अन्य घाटों पर आजतक शौचालय तक की व्यवस्था नहीं हो पायी. फलत: यहां स्वच्छता अभियान की हवा निकल रही है और शौच की तलब होने पर लोग गंगा किनारे ही इधर-उधर शौच त्याग करते हैं.
शौचालय के अभाव में ‘लज्जा’ हो रही भंग : गंगा घाटों पर स्नान के लिए महिला व युवतियों को शौचालय के अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. शौच की जरूरत महसूस होने पर महिलाएं इधर-उधर झांकने लगती है. झांड़ी व ओठ की तालाश में घाटों पर महिलाओं घुमती रहती है. मजबूरन खुले में ही शौच को वे विवश हो जाती है.
इतना ही नहीं स्नान करने के बाद खुले में ही कपड़ा बदलने की विवशता है. क्योंकि कुछ घाटों पर वस्त्र बदलने के लिए कमरे तो बनाये गये हैं. लेकिन रखरखाव के अभाव में उसका उपयोग नहीं हो पा रहा. फलत: महिलाओं को लज्जा भंग कर ही इन घाटों पर गंगा स्नान व कपड़ा बदलना पड़ता है.
निगम प्रशासन उदासीन : गंगा घाटों पर शौचालय नहीं होने एवं कपड़ा बदलने के लिए उचित व्यवस्था के प्रति नगर निगम प्रशासन पूरी तरह उदासीन रही है. छठ पर्व के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं गंगा तट पर गंगा स्नान के लिए आ रही है. जबकि छठ पर्व पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है. किंतु निगम प्रशासन गंगा घाटों पर शौचालय निर्माण के प्रति पूरी तरह उदासीन रही है. छठ पर्व को लेकर आयुक्त, जिलाधिकारी एवं निगम अधिकारी भी गंगा घाटों का निरीक्षण कर रहे. लेकिन इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही है.
कहते हैं नगर आयुक्त
नगर आयुक्त एसके पाठक ने बताया कि अबतक गंगा घाटों पर शौचालय की व्यवस्था नहीं हो पायी है. प्रशासनिक निर्देश के आलोक में अस्थायी व्यवस्था की जा सकती है.
शौचालय की नहीं है व्यवस्था, खुले में शौच को विवश हैं महिलाएं
बदहाल है बबुआ घाट पर बना शौचालय
शहर के एक मात्र बबुआ घाट पर सामुदायिक शौचालय बना हुआ है. जिसका संचालन नगर निगम प्रशासन करता है. लेकिन यह शौचालय मात्र नाम का ही है. यह सामुदायिक शौचालय पूरी तरह बेकार हो गया है. जहां अब लोग इसका इस्तेमाल भी नहीं करते. दूसरी ओर कुछ हिस्सों पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है.
कहती हैं महिलाएं
गंगा स्नान करने पहुंची शांति देवी, आरती देवी, कुमुद कुमारी, बसंती देवी ने बताया कि छठ पर्व नेम-निष्ठा का सबसे बड़ा पर्व है. इसलिए इस पर्व को बड़का पर्व कहा जाता है. उत्तर वाहिनी गंगा होने के कारण मुंगेर ही नहीं लखीसराय, जमुई, शेखपुरा तक से लोग इन घाटों पर पहुंच कर गंगा स्नान करती है. मुंगेर के सैकड़ों महिलाएं ऐसी है जो बड़का पर्व इन्हीं घाटों पर करती है. प्रशासन को चाहिए कि इन घाटों पर स्थायी नहीं तो कम से कम अस्थायी तौर पर शौचालय व कपड़ा बदलने के लिए कुछ जगहों पर व्यव्स्था करें.
खतरनाक घाट को चिह्नित करने का निर्देश

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