कागज पर ही चल रहा सदर अस्पताल में डायबिटीज सेंटर

न ओपीडी और न ही दवा की व्यवस्था, निजी क्लिनिक के सहारे डायबिटीज मरीज मुंगेर : वर्तमान समय में डायबिटीज रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. इसके निदान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के कुछ सदर अस्पतालों में डायबिटीज सेंटर की स्थापना की है. इसमें मुंगेर जिला भी शामिल है. किंतु यह सेंटर […]

न ओपीडी और न ही दवा की व्यवस्था, निजी क्लिनिक के सहारे डायबिटीज मरीज

मुंगेर : वर्तमान समय में डायबिटीज रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. इसके निदान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के कुछ सदर अस्पतालों में डायबिटीज सेंटर की स्थापना की है. इसमें मुंगेर जिला भी शामिल है. किंतु यह सेंटर सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है़ यहां डायबिटीज मरीजों के लिए न तो आउटडोर सेवा की व्यवस्था है और न ही दवा की. हाल यह है कि मरीजों को डायबिटीज के इलाज के लिए निजी क्लिनिक का ही सहारा है.
नहीं है आउटडोर की व्यवस्था: पूर्व में सदर अस्पताल में डायबिटीज पीड़ित मरीजों के लिए आउटडोर सेवा की अलग से व्यवस्था दी गयी थी़ इसके लिए एक चिकित्सक को भी प्रतिनियुक्त किया गया था़ किंतु कुछ ही दिनों के बाद आउटडोर सेवा को बंद कर दिया गया़ जिसके बाद से डायबिटीज के मरीजों के इलाज के नाम पर सदर अस्पताल में महज खानापूर्ति की जा रही है़ अस्पताल के जीओपीडी में बैठने वाले फिजिशियन ही डायबिटीज रोगियों को देखते हैं और उन्हें दवा का पुरजा लिख कर थमा दिया जाता है. इस परिस्थिति में गरीब रोगियों के लिए इस रोग के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है.
उपलब्ध नहीं है डायबिटीज की दवा: डायबिटीज की बीमारी को लेकर अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह उदासीन है़ कागजी तौर पर भले ही सदर अस्पताल में डायबिटीज सेंटर चल रहा हो, किंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही है़ यहां बदहाली इस कदर छायी हुई है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए अस्पताल में दवा तक उपलब्ध नहीं है़ पूरबसराय निवासी डायबिटीज पीड़ित सुबोध प्रसाद ने बताया कि जीओपीडी में चिकित्सक ने उन्हें दवा लिखा़ किंतु दवा काउंटर पर मौजूद फर्मासिस्ट ने उसे बताया कि डायबिटीज की दवा यहां उपलब्ध नहीं है़ जिसके बाद उन्हें बाहर से दवा की खरीदारी करनी पड़ी़
रोगियों को दवा भी नहीं है मयस्सर
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फिलहाल यहां पर डायबिटीज मरीजों के लिए अलग से ओपीडी की व्यवस्था नहीं है़ यदि कोई अत्यंत गरीब मरीज आ जाते हैं, तो उसे जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा दवा खरीद कर उपलब्ध कराया जाता है़

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