जमालपुर : अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर रविवार को एकता कमेटी जमालपुर के तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन किये गये. इस दौरान संध्या में रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर एक आमसभा का आयोजन किया गया. जिसके अध्यक्ष मंडली में वीरेंद्र प्रसाद यादव, केडी यादव, प्रमोद कुमार, केजीपी सिंह तथा चांदसी पासवान शामिल थे. मुख्य अतिथि इआरएमयू के केंद्रीय संगठन मंत्री रामनगीना पासवान तथा विशिष्ट अतिथि उपाध्यक्ष सत्यजीत कुमार थे. वक्ताओं ने कहा कि सन 1827 में मेकेनिक्स यूनियन ऑफ फेलाडेलफिया ने पहली बार मजदूरों के काम के घंटे निर्धारित करने की लड़ाई लड़ी
थी तब काम के 10 घंटे निर्धारित किये गये. बाद में अमेरिका में नेशनल लेबर यूनियन का गठन हुआ तथा मजदूरों के लिये आठ घंटे का काम निश्चित हुआ. 1 मई 1886 को शिकागो में तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया था. दो दिन तो ठीकठाक बीता, परंतु तीसरे दिन मेकार्मिक हार्वेस्टिंग कंपनी में पुलिस ने घुस कर अनावश्यक फायरिंग झोंक दी जिसमें छह मजदूरों की अकाल मृत्यु हो गई थी.
11 नवंबर 1887 को चार मजदूर नेताओं को फांसी की सजा सुनाई गई. 14 जुलाई 1889 को इसको लेकर 1 मई को पूरी दुनिया में मजदूर दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई. जबकि भारत में 1923 से यह आयोजन आरंभ हुआ. उन्होंने कहा कि आज सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में असंगठित मजदूरों की संख्या 91 प्रतिशत हो गयी है. जबकि संगठित क्षेत्र में मात्र 9 प्रतिशत मजदूर ही रहने दिया गया है. बेरोजगारी बढ़ रही है तो सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं ध्वस्त हो गयी है.
मजदूर वर्ग की असमानता के कारण ही अमीर और भी अमीर तथा गरीब और भी गरीब होते जा रहा है. वक्ताओं में युगल किशोर यादव, ओमप्रकाश साह, अनिल यादव, राजेंद्र यादव, मुख्य रूप से शामिल थे. इससे पहले प्रात: में कमेटी द्वारा प्रभातफेरी का आयोजन किया गया. रेलवे स्टेशन से निकल कर यह पूर्व रेलवे मुख्य अस्पताल के गेट पर संपन्न हुआ.
