मुंगेर : पंचायत चुनाव को लेकर शुक्रवार को गंगा पार दियारा इलाके में पुलिस अधीक्षक आशीष भारती के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया गया. जवानों ने प्लेग मार्च किया और भौगोलिक स्थिति का अवलोकन किया.
छापेमारी के दौरान बहादुरनगर कचहरी टोला से दो अभियुक्तों को भी गिरफ्तार किया गया जो पिछले 19 साल से फरार चल रहा था. पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष कराने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार अभियान चला रही है. शुक्रवार को पुलिस कप्तान के नेतृत्व में गंगा पार जाफरनगर एवं कुतलुपुर दियारा क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया गया. अवैध शराब एवं अवैध हथियार निर्माण को लेकर छापेमारी भी की गयी. साथ ही एरिया डोमनेशन व वारंटियों कि गरफ्तारी भी सुनिश्चित की गयी.
50 मोटरसाइकिल से एसटीएफ एवं जिला बल के जवानों ने घंटों दियारा क्षेत्र का दौरा किया. पुलिस ने बहादुरपुर कचहरी टोल में छापेमारी कर जग चौधरी को गिरफ्तार किया जो 19 वर्ष पूर्व एक अगलगी कांड में अभियुक्त था. वह तभी से फरार चल रहा था. जबकि एक अन्य फरार अभियुक्त को भी गिरफ्तार किया गया. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पंचायत चुनाव में भयमुक्त होकर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके. यह पुलिस का लक्ष्य है. इसी के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है.
शहर के प्रसिद्ध गोमती गोयनका मातृ सदन में एक नवजात शिशु के मौत का मामला उलझ गया है. मातृ सदन प्रबंधन ने जहां तत्काल अपने आउटडोर व इंडोर सेवा को बंद कर दिया है और यहां प्रसव संबंधी चिकित्सकीय व्यवस्था ठप कर दी है. वहीं दूसरी ओर बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने नवजात शिशु की मौत के मामले पर संज्ञान लेते हुए इस मामले के जांच का निर्णय लिया है.
मुंगेर : चार दशक से प्रसव केंद्र के रूप में प्रसिद्ध गोमती गोयनका मातृ सदन प्रबंधन ने एक नवजात शिशु के मौत के मामले में इस कदर उलझ गया है कि पिछले दो दिनों से यहां आउटडोर व इंडोर की सेवा बंद कर दी गयी है. यहां न तो गर्भवती महिलाओं को आउटडोर में देखा जा रहा है और न ही प्रसव पीडि़त महिलाओं को भरती किया जा रहा. प्रबंधन के इस निर्णय से शहरवासी भी भौचक है. क्योंकि नर्सिंग होम में नवजात की मौत के बाद कोई असामान्य स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और न ही पीडि़त परिवार ने किसी प्रकार का उत्पात मचाया. फिर प्रबंधन ने स्वास्थ्य सेवा बंद करने का निर्णय क्यों लिया, यह सवालों के घेरे में है.
क्या है मामला. गोयनका मातृ सदन में 26 अप्रैल को शहर के दिलावरपुर निवासी हसन इमाम की पुत्री फौजिया हसन ने सीजिरियन पद्धति से एक नवजात को जन्म दिया. जन्म के बाद शिशु की स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण उसे नर्सिंग होम में ही इंक्यूवेटर में रखा गया.
यहां बच्चे के स्वास्थ्य की स्थिति नहीं सुधरी और 27 अप्रैल की सुबह 10 बजे उसकी मौत हो गयी. परिजनों का आरोप है कि यहां बच्चे का सही उपचार नहीं हुआ और उनके आग्रह के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से बच्चे का इलाज नहीं कराया. इतना ही नहीं पूर्वाह्न 10 बजे जिस बच्चे की मौत हुई उसके मृत्यु की घोषणा अपराह्न 02:42 बजे की गयी. आखिर नवजात के मौत के बाद भी मृत्यु घोषित करने में अस्पताल प्रबंधन ने 4 घंटे 42 मिनट का समय क्यों लगाया.
मो सलाम का रिश्तेदार था नवजात. गोयनका मातृ सदन में जिस नवजात शिशु की मौत हुई वह बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मो. सलाम का रिश्तेदार था. नवजात मो. सलाम के बड़े भाई मो. हसन इमाम की पुत्री फौजिया हसन का पुत्र था. इस मामले में मो. सलाम ने मातृ सदन प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जांच की बात कही है.
सूची देते ही परेशान हो उठा नर्सिंग होम प्रबंधन : मुंगेर. मातृ सदन में नवजात की मौत की सूचना पर पहुंचे राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मो. सलाम ने प्रबंधन से यहां कार्यरत चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी की सूची मांगी. अस्पताल प्रबंधन ने सूची तो उपलब्ध करा दी. लेकिन उसकी परेशानी बढ़ गयी. क्योंकि जिन चिकित्सकों की सूची उपलब्ध करायी गयी उसमें कई चिकित्सक मुंगेर स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अस्पतालों में कार्यरत हैं.
इतना ही नहीं जिस डॉ एसके झा को मातृ सदन ने चाइल्ड स्पेशलिस्ट एंड फिजिशियन बताया है वह चाइल्ड स्पेशलिस्ट नहीं है. साथ ही डॉ एसके झा मुंगेर सदर प्रखंड पीएचसी में पदस्थापित है. इसके अतिरिक्त सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक डॉ सन्नी, डॉ राजीव कुमार एवं डॉ शाहिद वसीम को भी नर्सिंग होम प्रबंधन ने अपने सूची में ऑन कॉल दर्शाया है. नर्सिंग होम प्रबंधन की परेशानी यह है कि वह बिना चाइल्ड स्पेशलिस्ट चिकित्सक के ही विशेष नवजात शिशु केंद्र का संचालन करता रहा है.
