निजी क्लिनिक के चक्कर में चिकित्सक सरकारी अस्पताल के मरीजों को दिखा रहे ठेंगा
अस्पताल में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम बना हाथी का दांत
मुंगेर : सदर अस्पताल के शिशु ओपीडी में गुरुवार को प्रात: कालीन ओपीडी के दौरान जैसे ही घड़ी का कांटा 11:25 पर पहुंची कि डॉक्टर साहब अपना आला संभालते हुए गाड़ी में सवार हो गये. वहीं मरीज के परिजन इस इंतजार में वहां एक घंटे तक बैठे रहे कि डॉक्टर साहब शीघ्र ही लौट कर आयेंगे और उनके बच्चे का इलाज करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके कारण मरीज को बिना इलाज कराये ही घर लौटना पड़ा.
बिना इलाज कराये ही लौटे मरीज : चक्षु विभाग में शिफ्ट शिशु ओपीडी में गुरुवार को डॉ सनी की ड्यूटी थी. मरीजों की मानें तो वे ड्यूटी पर 8:30 के बाद पहुंचे थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने मरीजों की भीड़ खत्म होते देखा कि वैसे ही वे अपना आला उठाये और ड्यूटी छोड़ कर निकल गये. उस समय दिन के 11:25 बज रहे थे. डॉक्टर साहब अभी निकले ही थे कि पूरबसराय निवासी महिला रीता देवी अपने तीन साल के पुत्र मयंक को लेकर शिशु वार्ड पहुंची.
उनके पुत्र को तेज बुखार था. महिला ने वहां पर मौजूद एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी से जब डॉक्टर साहब के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इतना देर करके क्यों आये, डॉक्टर साहब तो निकल गये. पता नहीं अब अभी वापस आयेंगे या नहीं. बावजूद महिला वहीं पर लगे एक बेंच पर बैठ गयी, लेकिन एक घंटा बीत जाने के बाद जब चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी चक्षु विभाग के मेन गेट में ताला लगाने लगा तो महिला अपने बच्चे का इलाज कराये बिना ही मायूस होकर घर लौट गयी.
आते हैं लेट से, जाने में जल्दबाजी : ओपीडी ड्यूटी में अक्सर यह देखने को मिलता है कि चिकित्सक अपने निर्धारित समय के कुछ देर बाद ही ड्यूटी कक्ष पर पहुंचते हैं, लेकिन जाने के क्रम में वे हमेशा गैप ढूंढ़ने में लगे रहते हैं. जैसे ही मरीज के भीड़ को छंटते देखते हैं, चिकित्सक अपना आला समेटते हुए ओपीडी से निकल जाते हैं.
थंब सिस्टम अटेंडेंस हाथी का दांत : सदर अस्पताल में पिछले दिनों चिकित्सक व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के देर से आने व समय से पहले ही ड्यूटी छोड़ कर चले जाने को लेकर बायोमेट्रिक एटेंडेंस मशीन लगाया गया, लेकिन वर्तमान में यह मशीन महज हाथी का दांत बन कर रह गया है. आज भी चिकित्सक रजिस्टर पर अपनी हाजिरी बनाते हैं.
कोई- कोई सौकिया रूप से थंब भी लगाते हैं, लेकिन चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन भुगतान रजिस्टर में बने अटेंडेंस से ही किया जा रहा है. इससे चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को थंब अटेंडेंस मशीन के लगाये जाने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. गौर किया जाये तो ऐसा प्रतीत होता है कि अस्पताल के अधिकारी खुद से चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों पर मेहरबान बने हुए हैं.
