मनमानी . ऑटो चालक खुद तैयार करते हैं रूट चार्ट

जहां हुआ मन, वहीं स्टैंड शहर में ऑटो चालकों के लिए कोई भी रूट चार्ट नहीं है. ऑटो चालक नियमों को ताख पर रख कर खुद का रूट चार्ट तैयार कर लेते हैं. जहां मन हुआ, वहीं स्टैंड बना देते हैं. जिस मार्ग से वह गुजरते हैं, वही हो जाता है उनका रूट चार्ट. इससे […]

जहां हुआ मन, वहीं स्टैंड

शहर में ऑटो चालकों के लिए कोई भी रूट चार्ट नहीं है. ऑटो चालक नियमों को ताख पर रख कर खुद का रूट चार्ट तैयार कर लेते हैं. जहां मन हुआ, वहीं स्टैंड बना देते हैं. जिस मार्ग से वह गुजरते हैं, वही हो जाता है उनका रूट चार्ट. इससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बदहाल हो गयी है व जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रहती है.
मुंगेर : प्रशासनिक स्तर पर सभी मार्गों के लिए रूट चार्ट जारी है. बावजूद इसके रूट का यहां कोई मायने नहीं रह जाता है. परिवहन विभाग द्वारा तैयार रूट चार्ट के मुताबिक जमालपुर जाने वाली वाहनों को स्टैंड से खुलने के बाद भगत सिंह चौक, कोड़ा मैदान, अंबे चौक कोणार्क मोड़ होते हुए सीधे जमालपुर जाना है.
जबकि बरियारपुर की ओर जाने वाली वाहनों को स्टैंड से खुलने के बाद सीधे पूरबसराय होते हुए गोशाला मोड़ तेलिया तलाब से एनएच पर चढ़ना है. जबकि मैदनीचौकी जाने के लिए भगत सिंह चौक-लल्लू पोखर होते हुए ऑटो को जाना है.
परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित चार्ट कोई मायने नहीं रखता है. नियमों को बिगाड़ने में सबसे बड़ा हाथ जमालपुर मार्ग में चलने वाले ऑटो चालकों का है. उस मार्ग पर चलने के लिए वह खुद रूट चार्ट बना लेता है. कोई किला परिसर से खुलता है तो कोई पूरबसराय से. इतना ही नहीं शहर के राजीव गांधी चौक, किताब गली, नीलम चौक, शास्त्री चौक, सितारिया चौक, जहाज घाट जैसे दर्जन भर स्थान हैं जहां से वे सवारी उठाते है. शहर के हर दिशा से वे अपनी ऑटो को खोलते है और सवारी बैठाते है.
नाबालिग चालकों ने
बढ़ायी परेशानी
मुंगेर शहर से विभिन्न दिशाओं के लिए लगभग 300 से अधिक ऑटो खुलती है. जिसमें अधिकांश नाबालिग चालक ही हैं. न तो उनके पास कोई वाहन चलाने का लाइसेंस होता है और न ही उसे मार्ग की जानकारी होती है. जिसके कारण वह इधर-उधर मार्ग से ऑटो का परिचालन करता है.
बिगड़ गयी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था
ऑटो चालकों की मनमानी से शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पुरी तरह लचर हो गयी है. जहां होता है वहीं ऑटो खड़ा कर दिया जाता है. शहर के मुख्य मार्गों पर भी ऑटो चालक वाहन रोक कर सवारी बैठाते हैं. इससे लोगों को परेशानी होती है.
प्रशासनिक उदासीनता से बिगड़ी स्थिति
प्रशासनिक उदासीनता के कारण शहर में ऑटो चालकों के लिए रूट चार्ट कोई मायने नहीं रखता है. न तो संबंधित थाना उसे रोकने का प्रयास करती है और न ही ट्रैफिक पर तैनात सिपाही. प्रशासनिक स्तर पर रूट चार्ट के निर्धारण के लिए कभी कोई अभियान नहीं चलाया जाता है. जिससे इनकी मनमानी बढ़ती जा रही है.
अवैध स्टैंड से बढ़ी परेशानी
ऑटो चालकों ने मुख्य स्टैंड के अलावे भी आधे दर्जन स्थानों पर अवैध रुप से स्टैंड बना लिया है. जिसमें पूरबसराय रेलवे अंडर पुल, राजीव गांधी चौक, सितारिया चौक, कोड़ा मैदान, अस्पताल रोड मुख्य है. यहां हमेशा आधे दर्जन से अधिक ऑटो लगी रहती है.
कहते हैं पदाधिकारी
जिला परिवहन पदाधिकारी नजीर अहमद ने कहा कि सभी दिशाओं में चलने वाले वाहनों के लिए रूट चार्ट निर्धारित है. अगर ऑटो चालक इसका उल्लंघन करते हैं तो उसके लिए परिवहन एक्ट के अनुसार फाइन निर्धारित है. समय-समय पर अभियान चला कर रूट चार्ट के अनुसार वाहन चालकों पर कार्रवाई भी की जाती है.

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