छंदों के राजकुमार थे छंदराज फोटो संख्या : 9फोटो कैप्सन : गोष्ठी करते साहित्यकार प्रतिनिधि : मुंगेर गजलगो छंदराज के निधन पर साहित्यिक संस्था गंगोत्री एवं साहित्य प्रहरी के तत्वावधान में अलग-अलग शोकसभा आयोजित की गयी. जिसमें साहित्यकारों एवं विद्वानों ने उनके गजल, साहित्यिक रचनाएं व साहित्य के प्रति उनकी देन पर चर्चा की. साथ ही दो मिनट का मौन रख कर उनके आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की. गंगोत्री के तत्वावधान में आयोजित शोकसभा में प्रो. शिवचंद्र प्रताप ने कहा कि एक माह पूर्व गंगोत्री की गोष्ठी में छंदराज ने अपने जीवन का अंतिम सस्वर काव्य पाठ करते हुए कहा था कि ” दर्द कब तक सहा कीजिए, चारागर से कहा कीजिए ” सुनाया. मीरा की पीड़ा को संचित करने वाली यह पंक्ति याद हो आयी ” अपनी पीड़ा तब खोलू, जब वैद सांवरिया होय ”. निश्चय ही छंदराज ऊपर वाले चारागर के पास आने दर्द की दवा मांगने चले गये. मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि ” गुरु नवै जो शिष्य को गुरु कहावै सोय ” छंदराज मेरे शिष्य थे. डॉ पूनम रानी ने उनके जाने से हिंदी और उर्दू दोनों साहित्य के लिए क्षति बताया. डॉ केके बाजपेयी ने कहा कि छंदराज के जाने से मुंगेर की शान चली. दुष्यंत कुमार युग का एक छतनार वृक्ष हम से ओझल हो गया. मौके पर शिवनंदन सलिल, विधुशेखर, नारायण शर्मा, सुनील सौरभ, कैलाश राय, रमन ने भी शोक संवेदना व्यक्त की. इधर साहित्य प्रहरी के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में अधिवक्ता यदुनंदन झा एवं मधुसूदन आत्मीय ने कहा कि महाप्राण निराला जैसी साधुता, निष्छलता एवं अखरपन कवि छंदराज की रचनाओं में थी. विजेता मुदगलपुरी ने कहा कि छंदों पर एकाधिकार के कारण ही उन्हें छंदराज कहा जाने लगा. नारायण जालान, अंजनी कुमार सुमन, श्रीनिवास, शिवनंदन सलिल, प्रो. शिवरानी ने अपने व्यक्तिगत संबंधों का जिक्र करते हुए उनके निधन को साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया.
छंदों के राजकुमार थे छंदराज
छंदों के राजकुमार थे छंदराज फोटो संख्या : 9फोटो कैप्सन : गोष्ठी करते साहित्यकार प्रतिनिधि : मुंगेर गजलगो छंदराज के निधन पर साहित्यिक संस्था गंगोत्री एवं साहित्य प्रहरी के तत्वावधान में अलग-अलग शोकसभा आयोजित की गयी. जिसमें साहित्यकारों एवं विद्वानों ने उनके गजल, साहित्यिक रचनाएं व साहित्य के प्रति उनकी देन पर चर्चा की. साथ […]
