चुनाव आचार संहिता के कारण लटकी करोड़ों की योजनाएं

मुंगेर : चुनाव आचार संहिता के कारण योजना विभाग द्वारा संचालित दर्जनों योजना लटक गयी है. जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किया जाना है. योजना के लंबित रहने के कारण मुंगेर का विकास भी प्रभावित हो रहा. योजना विभाग द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना, एकीकृत योजना का दर्जन भर कार्य […]

मुंगेर : चुनाव आचार संहिता के कारण योजना विभाग द्वारा संचालित दर्जनों योजना लटक गयी है. जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किया जाना है. योजना के लंबित रहने के कारण मुंगेर का विकास भी प्रभावित हो रहा. योजना विभाग द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना, एकीकृत योजना का दर्जन भर कार्य रुका पड़ा हुआ है. आचार संहिता लगने के कारण विभाग द्वारा विकास का कार्य पूर्णरुपेण ठप पड़ा हुआ है.

जबकि यहां के कई कर्मचारी को निर्वाचन कार्य में लगा दिया गया है. जिससे विभाग में काम नहीं के बराबर हो रहा है जो कार्य आचार संहिता लगने के पहले प्रारंभ हुआ वह भी रुका पड़ा है. क्योंकि विभाग में कार्य संपादन नहीं हो रही. संवेदक पैसा के अभाव में काम को रोक कर आचार संहिता खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं.

क्या है योजना की स्थिति सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 में आचार संहिता लगने से पहले 102 कार्य अनुशंसित किया गया. 102 योजना में मात्र 82 योजना को सहमति के लिए भेजा गया. जिसमें 47 योजना की सहमति तो प्राप्त हो गयी. लेकिन 41 योजना को ही प्रशासनिक स्वीकृति मिली. जिस पर 109 करोड़ खर्च होना है. 23 योजनाओं में भूमि, आवर्ति व्यय एवं रखरखाव की मांग की गयी. इसी बीच 9 सितंबर को बिहार चुनाव को लेकर आचार संहिता लग गया और योजना पर ब्रेक लग गया.

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में वर्ष 2015-16 में स्थानीय विधायक, एमएलसी द्वारा 301 योजना स्वीकृत की गयी. जिसमें आज भी 298 योजना अपूर्ण ही है. इसमें भी दर्जन भर योजना ऐसी है जो आचार संहिता पेंच में फंसा हुआ है. आचार संहिता खत्म होते ही पकड़ेगी रफ्तार विभाग की माने तो आचार संहिता लगने के कारण योजना की स्वीकृति नहीं दी जा सकती है. विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी निर्वाचन कार्य में लगा दिया गया. जिसके कारण विभाग का कार्य प्रभावित हो गया. 8 नवंबर को मतगणना होने के बाद कर्मचारियों को वापस किया जायेगा. आचार संहिता भी खत्म हो जायेगी और विकास की गाड़ी रफ्तार पकड़ेगी.

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