संगोष्ठी का आयोजनफोटो संख्या : 26फोटो कैप्सन : संगोष्ठी में उपस्थित अतिथि प्रतिनिधि , मुंगेरसरस्वती शिशु मंदिर सादीपुर में रविवार को भारतीय संगीत को पाश्चात्य कुप्रभाव से कैसे बचाया जाय विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. उसकी अध्यक्षता अवकाशप्राप्त जज अमीरदास ने की. उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत गहरा सागर है. यह ईश्वर की वंदना है. पश्चिमी देश इसकी गहराई में जा नहीं सकते, वह भौतिक खुशी के लिए विकृति का प्रसार भारत में कर रहा है. संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि गिरिन्द्र चंद्र पाठक व विशिष्ट अतिथि निर्मल जालान ने दीप प्रज्वलित कर किया. मुख्य अतिथि ने कहा कि भारतीय नृत्य ताल के बिना भाव भंगिमा और आंखें नवों रस की अभिव्यक्ति कर देती है. विशिष्ट अतिथि निर्मल कुमार जालान ने सरकार से अपेक्षा की कि हर नयी फिल्म में भारतीय संगीत का समावेश होना चाहिए. प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह ने कहा कि हर गुणीजन में वे गुरु की छवि देखते हैं. पुरातन छात्र व साहित्यकार-नाटककार मधुसूदन आत्मीय ने कहा कि संस्कृति और राष्ट्रवाद को अपना आदर्श कहने वाली भाजपा सरकार व्यावसायिक चैनलों को पाश्चात्य संगीत की विकृतियों का प्रसारण करने से रोक नहीं रहे हैं. मौके पर पंडित बलराम दास मिश्र, कौशल किशोर पाठक, राणा ऋषिदेव, प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह, संगीत साधक चंद्रशेखर, विजय विश्वकर्मा शंकर राय उपस्थित थे. इधर संगीत परिषद के सदस्यों की घोषणा की गई. जिसके संरक्षक जज अमीरदास व पंडित बलराम मिश्र, अध्यक्ष गिरींद्रचंद्र पाठक, उपाध्यक्ष परशुराम व निर्मल जैन, सचिव विजय विश्वकर्मा कोषाध्यक्ष निर्मल जालान व संगठन सचिव कौशल पाठक बनाये गये.
भारतीय संगीत को पाश्चात्य प्रभाव से बचाने की जरुरत
संगोष्ठी का आयोजनफोटो संख्या : 26फोटो कैप्सन : संगोष्ठी में उपस्थित अतिथि प्रतिनिधि , मुंगेरसरस्वती शिशु मंदिर सादीपुर में रविवार को भारतीय संगीत को पाश्चात्य कुप्रभाव से कैसे बचाया जाय विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. उसकी अध्यक्षता अवकाशप्राप्त जज अमीरदास ने की. उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत गहरा सागर है. यह ईश्वर की […]
