मुंगेर : एके-47 मामले को लेकर पुलिस जहां आरोपितों को सजा दिलाने के लिए एड़ी-चोटी एक किये हुए है, वहीं आरोपित जेल से बाहर निकलने के लिए लगातार अपनी जमानत कराने में जुटा है. न्यायालय भी इस कांड के आरोपितों पर सख्त है और पुख्ता सबूत के आधार पर लगातार आरोपितों के जमानत याचिका को खारिज किया जा रहा.
गुरुवार को भी एडीजे प्रथम के विद्वान न्यायाधीश ने सदा रिफत सहित एक अन्य अभियुक्त का जहां नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया. वहीं मो. लुकमान व उसकी पत्नी आयशा बेगम की अग्रिम जमानत याचिका को भी खारिज किया गया.
कोतवाली थाना कांड संख्या 555/18 में याचिका हुई खारिज : 26 दिसंबर 2018 को मुंगेर पुलिस ने एक एके-47, एके-47 की चार मैगजीन, एक मास्केट, एक पिस्टल, कारतूस व हथियार खरीदने के लिए लाये गये 50 हजार के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया था.
जिसमें पूरबसराय कमेला रोड निवासी तौसिफ इमाम उर्फ मो. रिजबी, मो. इरसाद अहमद एवं बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के सबदलपुर निवासी सत्यम कुमार शामिल थे. इस मामले को लेकर कोतवाली थाना में कांड संख्या 555/18 दर्ज किया गया.
इसी कांड के नामजद सत्यम कुमार ने नियमित जमानत याचिका के लिए न्यायालय में याचिका दायर किया था. जबकि इस मामले में एके-47 के मुख्य आरोपित मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मिर्जापुर बरदह गांव निवासी मो. इमरान की पत्नी सदा रिफत को जांच के बाद अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया.
इस मामले में नियमित जमानत को लेकर सदा रिफत ने भी याचिका दायर किया था. लेकिन सरकारी पीपी मो. शमीश अनवर ने जोरदार विरोध किया. बहस में अधिवक्ता के दलील सुनने के बाद एडीजे प्रथम के विद्वान न्यायाधीश पुरुषोत्तम मिश्रा ने नियमित याचिका को खारिज कर दिया. विदित हो कि इससे पूर्व भी एके-47 के दो मामलों में सदा रिफत की नियमित जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
