नेपाल बाढ़ त्रासदी में लापता छोटे भाई रामबाबू साह की तलाश में गए बड़े भाई वीरेंद्र प्रसाद मंगलवार शाम घर लौट आए, लेकिन उनके साथ कोई खबर नहीं थी. घर पहुंचते ही जब उन्होंने कहा, "बऊआ कहीं ना मिलल…", तो परिजनों की उम्मीद फिर इंतजार में बदल गयी. हादसे के सात दिन बाद भी रामबाबू साह, प्रमोद प्रसाद और मुनील कुमार का कोई पता नहीं चल सका है.
प्रभावित इलाकों में की खोजबीन
वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि नेपाल पहुंचने के बाद उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया. इसके बाद हादसे से प्रभावित संभावित इलाकों में जाकर लापता युवकों की तलाश की. उन्होंने कहा कि नेपाल में तबाही का मंजर बेहद भयावह है.
खोजबीन के दौरान वह लगातार इस उम्मीद में रहे कि कहीं से रामबाबू साह, प्रमोद प्रसाद और मुनील कुमार के बारे में कोई जानकारी मिल जाए. कई स्थानों पर तलाश के बावजूद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा.
त्रिशूली नदी के मेलौंग क्षेत्र में रेस्क्यू जारी
कंपनी की ओर से गठित रेस्क्यू टीम भी लापता युवकों की तलाश में जुटी है. टीम द्वारा त्रिशूली नदी के मेलौंग क्षेत्र में सघन तलाश अभियान चलाया जा रहा है. हादसे के एक सप्ताह बाद भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिलने से तीनों युवकों के परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
वीरेंद्र प्रसाद के घर लौटते ही परिजन उनसे लिपटकर रो पड़े. परिवार के लिए हर बीतता दिन चिंता बढ़ाने वाला है, लेकिन उम्मीद अब भी कायम है.
मोबाइल की हर घंटी से बंधी है उम्मीद
परिजनों की नजरें अब भी मोबाइल फोन पर टिकी हैं. घर में बजने वाली हर मोबाइल की घंटी एक पल के लिए उम्मीद जगाती है कि शायद लापता युवकों से जुड़ी कोई खबर आयी हो. परिजन उनके सकुशल लौटने की आस लगाए बैठे हैं.
वैश्य समाज ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा
इधर, वैश्य समाज के प्रखंड अध्यक्ष राजीव कुमार साह उर्फ राजू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने लापता युवकों के परिजनों से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने परिवार को सांत्वना देते हुए इस मुश्किल समय में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया.
इस दौरान परिजनों ने युवकों की जल्द सकुशल वापसी की उम्मीद जतायी. परिवार और समाज के लोग लगातार रेस्क्यू अभियान से मिलने वाली किसी सकारात्मक सूचना का इंतजार कर रहे हैं.
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