बेतिया राज की जमीन पर क्यों मचा घमासान? 600+ रैयतदार पुराने दस्तावेज लेकर पहुंचे प्रशासन के पास

बेतिया राज की जमीन को लेकर रक्सौल के तीन वार्डों के 600 से अधिक रैयतदार मोतिहारी पहुंचे. उन्होंने डीएम और एडीएम के सामने पुराने दस्तावेज, नीलामी के कागजात और न्यायालय के आदेश प्रस्तुत कर पूरे मामले की जांच की मांग की.

बेतिया राज जमीन: नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 9, 10 और 11 में बेतिया राज की जमीन को लेकर रैयतदारों के बीच बनी असमंजस की स्थिति अब जिला प्रशासन तक पहुंच गयी है. तीनों वार्डों के 600 से अधिक रैयतदार मंगलवार को अपने जमीन संबंधी कागजात लेकर मोतिहारी पहुंचे और डीएम सौरभ सुमन यादव व एडीएम मुकेश कुमार सिन्हा के समक्ष अपना पक्ष रखा. रैयतदारों ने बिहार सरकार की 14 जुलाई 2026 की अधिसूचना के संदर्भ में लिखित आवेदन और जमीन से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों को सौंपे.

1946 की नीलामी का हवाला देकर रखा पक्ष

रैयतदारों की ओर से प्रो. डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, प्रो. डॉ. चंद्रमा सिंह और रामचंद्र सिंह ने बताया कि स्व. जयकिशन राम ने 26 अप्रैल 1946 को बिहार बैंक से सात बीघा 13 कट्ठा छह धुर जमीन 34 हजार रुपये में नीलामी के माध्यम से प्राप्त की थी. उनके अनुसार जमीन से संबंधित पुराने दस्तावेज अब भी रैयतदारों के पास सुरक्षित हैं.

उन्होंने बताया कि उक्त जमीन से जुड़े कई खाता और खेसरा नंबरों का उल्लेख दस्तावेजों में है. रैयतदारों का दावा है कि नीलामी के करीब चार दशक बाद बेतिया राज की ओर से इस जमीन पर दावा किया गया था.

कोर्ट में भी चला जमीन का विवाद

रैयतदारों के अनुसार, बेतिया राज के दावे के खिलाफ स्व. जगमोहन लाल ने जिला न्यायालय, मोतिहारी में टाइटल सूट संख्या 189/1989 (48/89) दायर किया था. उनका कहना है कि न्यायालय ने नीलामी प्रक्रिया को वैध मानते हुए फैसला उनके पक्ष में दिया.

इसके बाद बेतिया राज की ओर से जिला न्यायालय में अपील दायर की गयी, जिसे भी रैयतदारों के अनुसार खारिज कर दिया गया. बाद में पटना हाइकोर्ट में भी मामले को लेकर रिट याचिका दायर की गयी. रैयतदारों का दावा है कि वहां से भी उनके पक्ष में आदेश पारित हुआ.

डीएम-एडीएम को सौंपे दस्तावेज

रैयतदारों ने न्यायालय के आदेशों, नीलामी से संबंधित कागजात और जमीन के अन्य दस्तावेजों की प्रतियां डीएम और एडीएम को सौंपीं. उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दस्तावेजों और पूर्व न्यायिक आदेशों के आधार पर न्यायोचित कार्रवाई की मांग की.

रैयतदारों ने बताया कि इसी मामले को लेकर राज्यपाल, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव, अनुमंडल पदाधिकारी रक्सौल और अंचलाधिकारी रक्सौल को भी प्रतिवेदन भेजा जा रहा है.

बोले रैयतदार- वैध दस्तावेजों के आधार पर रख रहे पक्ष

प्रो. डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, प्रो. डॉ. चंद्रमा सिंह और रामचंद्र सिंह ने कहा कि रैयतदार अपने पास उपलब्ध पुराने दस्तावेज और न्यायालय के आदेशों के आधार पर प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद न्यायसंगत निर्णय लिया जाएगा.

मौके पर वार्ड पार्षद रवि गुप्ता, कुंदन सिंह, राजेश गुप्ता, नवीन कुमार सिंह, मुद्रिका सिंह, बैकुंठ बिहारी सिंह, प्रेम शंकर तिवारी, अजय चौरसिया समेत तीनों वार्डों के सैकड़ों रैयतदार मौजूद रहे.

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लेखक के बारे में

By मनोज कुमार गुप्ता

मनोज कुमार गुप्ता बीते 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट, रेडियो और डिजिटल माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. वर्तमान में भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सीमा सुरक्षा और नेपाल की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं. सामाजिक सरोकारों में गहरी रुचि के साथ वे क्षेत्र की जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के प्रयासों के लिए जाने जाते हैं.

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