पहाड़पुर. जिले में तिलहन की पैदावार को बढ़ाने की दृष्टि से कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी द्वारा समूह अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण के अंतर्गत मूंगफली की खेती को किसानों के बीच शुरुआत की गयी है. इस नई पहल से तिलहन की खेती को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ फसल विविधिकरण को भी प्रोत्साहन मिलेगा. गरमा (जायद) ऋतु में तिलहनी फसलों में मूंगफली को सबसे लाभदायक फसल माना जाता है. इसे ‘किसानों का सोना’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह एक प्रमुख नगदी फसल है. इस संदर्भ में, डॉ. अंशू गंगवार, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि अभियंत्रण) ने कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी के प्रशिक्षण सभागार में पहाड़पुर प्रखंड के उत्तम किसान उत्पादक संगठन और तुरकौलिया प्रखंड के सामेंदु एग्रोप्रोडूयूसर संगठन के सदस्यों एवं अन्य किसानों के लिए मूंगफली की खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को मूंगफली की खेती से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान की गई. वहीं किसानों के बीच मूंगफली के बीज के साथ अन्य क्रिटिकल इनपुट की सहायता प्रदान की गयी. कार्यक्रम के शुभारंभ में डॉ. गंगवार ने किसानों को समूह अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि समूह अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण किसानों को नवीनतम पद्धतियों का हस्तांतरण करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है. मृदा विशेषज्ञ, डॉ. आशीष राय ने बताया कि गर्मी के मौसम में मूंगफली के बीज की लगभग 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करनी चाहिए.इसके दाने बड़े आकार के होते हैं, जिसमें तेल की मात्रा लगभग 45-50 प्रतिशत तक पाई जाती है. अन्य तकनीकी जानकारी के लिए विशेषज्ञों से समय-समय पर सलाह किसान जरूर लेते रहें.
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