मोतिहारी के मधुबन से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट
Operation Dhamaka Anniversary: 23 जून 2005 का दिन मधुबन के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है. आज ही के दिन करीब 1000 से अधिक सशस्त्र माओवादियों ने दिनदहाड़े मधुबन पर ‘ऑपरेशन धमाका’ के तहत हमला बोल दिया था. दोपहर करीब एक बजे शुरू हुए इस हमले में नक्सलियों ने एक साथ थाना, भारतीय स्टेट बैंक, प्रखंड सह अंचल कार्यालय, सांसद सीताराम सिंह के आवास और पेट्रोल पंप को निशाना बनाया था. अत्याधुनिक हथियारों से लैस नक्सलियों ने कई घंटों तक इलाके में तांडव मचाया था.
सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में गई थी 20 लोगों की जान
मधुबन से लौटते वक्त सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में कुल 20 लोगों की जान चली गई थी. मृतकों में 16 माओवादी और दो पुलिसकर्मी शामिल थे. हमले के दौरान सिपाही नासिर हुसैन और बैंक गार्ड रूप नारायण सिंह ने अदम्य साहस दिखाते हुए नक्सलियों का डटकर सामना किया था और लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे. नक्सलियों ने एसबीआई शाखा में लूटपाट भी की थी. इस हमले का मास्टरमाइंड हार्डकोर नक्सली कमांडर रामप्रवेश बैठा और रामबाबू राम था. इसमें नेपाल और अन्य राज्यों के नक्सली भी शामिल थे.
21 वर्षों बाद पटरी पर लौटी व्यवस्था
इस भयावह हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था और शाम 6 बजे के बाद बाजार बंद हो जाता था. हालांकि, सरकार की सख्ती और सीआरपीएफ की तैनाती के बाद अब व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो चुकी है. मास्टरमाइंड रामप्रवेश बैठा जेल से आकर मुख्यधारा में लौटने की कोशिश में जुटा है, जबकि रामबाबू राम फिलहाल जेल में बंद है. घटना के 21 वर्ष बीतने के बाद भी शहीदों की बहादुरी और उस खौफनाक दिन की यादें लोगों के जेहन में ताजा हैं.
