Raxaul DEMU Train: समस्तीपुर रेल मंडल के अंतर्गत संचालित नरकटियागंज-दानापुर डेमू ट्रेन (15115) इन दिनों यात्रियों की भारी भीड़ के कारण चर्चा में है. उत्तर बिहार और सीमांचल के हजारों लोगों के लिए यह ट्रेन रोजमर्रा की यात्रा का प्रमुख साधन है, लेकिन बढ़ती भीड़ और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने सफर को मुश्किल बना दिया है. यात्रियों का कहना है कि स्थिति ऐसी हो गई है कि कई बार सीट तो दूर, खड़े होने तक की जगह नहीं बचती.
प्रतिदिन सुबह 3:25 बजे नरकटियागंज से रवाना होने वाली यह ट्रेन चनपटिया, बेतिया और सुगौली होते हुए सुबह 5:50 बजे रक्सौल पहुंचती है. यहां से सुबह 6 बजे आदापुर, छौड़ादानो, घोड़ासहन, बैरगनिया, सीतामढ़ी, रून्नीसैदपुर, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, पाटलिपुत्र होते हुए दानापुर के लिए रवाना होती है. नौकरीपेशा लोग, छात्र, छोटे व्यवसायी और इलाज के लिए सफर करने वाले यात्री बड़ी संख्या में इसी ट्रेन पर निर्भर हैं.
रक्सौल पहुंचने से पहले ही भर जाती हैं सीटें
स्थानीय यात्रियों के अनुसार, ट्रेन नरकटियागंज से खुलने के बाद ही तेजी से भरने लगती है. सुगौली तक पहुंचते-पहुंचते अधिकांश सीटें भर जाती हैं. इसके बाद रक्सौल, आदापुर, छौड़ादानो और घोड़ासहन समेत अन्य स्टेशनों से बड़ी संख्या में यात्री सवार होते हैं. सीतामढ़ी तक पहुंचते-पहुंचते डिब्बों में इतनी भीड़ हो जाती है कि यात्रियों को दरवाजों और गैलरी में खड़े होकर सफर करना पड़ता है.
यात्रियों का कहना है कि भीड़ के कारण कई बार आपात स्थिति में भी एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक जाना मुश्किल हो जाता है. लंबे सफर के दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है.
शौचालय की कमी से बढ़ रही दिक्कत
यात्रियों की एक बड़ी शिकायत ट्रेन में शौचालय की व्यवस्था को लेकर भी है. उनका कहना है कि अधिकांश कोचों में शौचालय नहीं हैं और जहां उपलब्ध हैं, वहां भी भीड़ के कारण पहुंचना कठिन हो जाता है. कई बार शौचालय के बाहर भी यात्री खड़े रहते हैं, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को काफी असुविधा होती है.
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि पर्याप्त और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से सफर और भी कठिन हो जाता है.
पहले रक्सौल से चलती थी ट्रेन
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यह डेमू ट्रेन केवल रक्सौल से दानापुर के बीच संचालित होती थी, तब यहां के यात्रियों को आसानी से सीट मिल जाती थी. बाद में पहले इसका विस्तार सुगौली और फिर नरकटियागंज तक कर दिया गया. इसके बाद रक्सौल पहुंचते-पहुंचते अधिकांश सीटें पहले ही भर जाती हैं, जिससे स्थानीय यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है.
यात्रियों का मानना है कि ट्रेन के विस्तार से अधिक लोगों को सुविधा मिली है, लेकिन बढ़ती भीड़ के अनुपात में कोचों या अन्य सुविधाओं में वृद्धि नहीं की गई.
रेलवे से उठी कई मांगें
प्रतिदिन यात्रा करने वाले लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए डेमू ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं या फिर इस रूट पर एक और यात्री ट्रेन का परिचालन शुरू किया जाए. इसके अलावा सभी कोचों में पर्याप्त और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा ट्रेन के संचालन की व्यवस्था की समीक्षा करने की भी मांग की गई है.
यात्रियों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ेगी. इससे यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है. उनका मानना है कि उत्तर बिहार के इस व्यस्त रेलखंड पर यात्रियों की वास्तविक संख्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे को शीघ्र स्थायी समाधान निकालना चाहिए.
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