मधुबन से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट
Motihari News: सोमवती अमावस्या का पावन संयोग आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. इस बार इसकी खास बात यह है कि पुरुषोत्तम मास का समापन भी इसी तिथि पर हो रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है. हिंदू मान्यताओं में सोमवती अमावस्या को पितरों के स्मरण, दान-पुण्य और भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान, पूजा और व्रत कर अपने पूर्वजों का आशीर्वाद पाने की कामना कर रहे हैं.
पितरों की कृपा पाने का विशेष अवसर
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है. माना जाता है कि इस दिन तर्पण, जल अर्पण और पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है. सुहागन महिलाएं भी पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं.
खान-पान में बरतें सावधानी
इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है. मांस, मछली, अंडा, शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखने को कहा गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुद्ध और सात्विक भोजन करना अधिक शुभ माना जाता है.
ये चीजें मानी जाती हैं शुभ
फल, दूध, दही, खीर, साबूदाना, सिंघाड़े और कुट्टू के आटे से बने व्यंजन का सेवन लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा पीपल वृक्ष की पूजा, भगवान शिव का अभिषेक और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व फल का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इससे पितृ दोष कम होता है और घर-परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है.
