Motihari News: मोतिहारी सदर प्रखंड के अंतर्गत गोढ़वा पंचायत से सरकारी तंत्र की एक बेहद निराशाजनक तस्वीर सामने आई है. यहाँ का करोड़ों की लागत से बना आधुनिक पंचायत सरकार भवन आम जनता के लिए पूरी तरह ‘शोपीस’ बनकर रह गया है. पंचायत भवन पर नियमित रूप से ताला लटका रहने के कारण स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है. गुरुवार (4 जून 2026) को चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच अपने जरूरी कार्यों के लिए दूर-दराज से पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों को दफ्तर में ताला बंद देख निराश होकर वापस लौटना पड़ा.
बोर्ड पर लिखे हैं 11 अधिकारियों के नाम, पर दफ्तर में फैला सन्नाटा
हैरानी की बात यह है कि गोढ़वा पंचायत भवन के मुख्य सूचना पट्ट पर आम जनता की सहूलियत के लिए एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 11 महत्वपूर्ण पदों और कर्मियों के नाम व ड्यूटी रोस्टर अंकित हैं. इस लिस्ट में निम्नलिखित कर्मियों के नाम शामिल हैं: पंचायत सचिव, राजस्व कर्मचारी (हल्का कर्मचारी), तकनीकी सहायक व लेखापाल, कृषि समन्वयक व कृषि सलाहकार, पीआरएस (रोजगार सेवक), ग्रामीण आवास सहायक,कार्य सहायक व विकास मित्र, कचहरी सचिव.
इन सभी भारी-भरकम पदों के बोर्ड टंगे होने के बावजूद, गुरुवार को जमीनी हकीकत का जायजा लेने पहुंचे ग्रामीणों को कार्यालय के भीतर एक भी कर्मी या चपरासी मौजूद नहीं मिला. पूरा परिसर पूरी तरह वीरान पड़ा हुआ था.
कागजों पर डिजिटल सर्विस
पंचायत भवन पहुंचे पीड़ित ग्रामीणों ने अत्यंत मायूसी के साथ बताया कि सरकार ने नियम बनाया है कि अब जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना, भूमि का म्यूटेशन (राजस्व संबंधी मामले) और कृषि इनपुट जैसे छोटे-छोटे लोक-कल्याणकारी कार्यों के लिए जिला या ब्लॉक मुख्यालय नहीं दौड़ना पड़ेगा; ये सारे काम पंचायत भवन में ही होंगे.
जाति-आवासीय के लिए तरस रही जनता
परंतु, यहाँ की जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है. अधिकांश समय कर्मियों के लापता रहने के कारण लोगों को अपने जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए दलालों और इंटरनेट कैफे के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से भवन और कंप्यूटर जैसी कड़क सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के बावजूद, सिर्फ मानव संसाधन की लापरवाही के कारण उन्हें हर दिन भटकना पड़ रहा है.
कर्मचारियों की मोबाइल लोकेशन जांचे सरकार
स्थानीय नागरिकों और युवाओं का कहना है कि जब भी किसी लापता कर्मी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की जाती है, तो वे एक से अधिक पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार (चार्ज) होने का घिसा-पिटा बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं. इससे पंचायत स्तर पर चल रही तमाम विकास योजनाएं और सरकारी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं.
ग्रामीणों ने खोली अफसरों की पोल
उग्र ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी (DM) से कड़ाई से मांग की है कि यदि ड्यूटी अवधि के दौरान इन संबंधित लापरवाह कर्मियों के आधिकारिक मोबाइल नंबरों की ‘टॉवर लोकेशन’ (Tower Location) की तकनीकी जांच कराई जाए, तो वास्तविक स्थिति दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगी कि ये कर्मी फील्ड के नाम पर घर बैठे हैं या कहीं और व्यस्त हैं.
कह-कह कर थक चुके हैं, कोई नहीं सुनता
इस गंभीर और संवेदनशील प्रशासनिक लापरवाही पर अपना पक्ष रखते हुए गोढ़वा पंचायत के मुखिया राजू बैठा ने बेबसी जाहिर की है. उन्होंने बताया कि पंचायत भवन में कर्मियों की लगातार अनुपस्थिति का मामला वे स्थानीय पंचायत स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक कई बार लिखित और मौखिक रूप से उठा चुके हैं. मुखिया ने कड़े शब्दों में कहा, “हम तो इन कर्मचारियों को कह-कह कर थक गए हैं, लेकिन इनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगती और स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है.”
लापरवाह कर्मियों पर बरसे मुखिया
मुखिया राजू बैठा ने बताया कि इस बार पूरे साक्ष्य के साथ मामले की कड़क जानकारी मोतिहारी सदर के प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) पुरुषोत्तम वरुणा नंदन को भी दे दी गई है. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन बेपरवाह बाबुओं पर क्या कड़ा एक्शन लेता है या जनता यूँ ही इस भीषण गर्मी में ताले की चाबी का इंतजार करती रहेगी.
मोतिहारी से सामंत कुमार गौतम की रिपोर्ट
