Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले के मेहसी में प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा अब्दुल हलीम शाह चिश्ती के 779वें उर्स के पावन अवसर पर पांच दिवसीय सद्भावना मेला 26 जून से धूमधाम के साथ आरंभ हो चुका है. यह मेला आगामी 30 जून तक चलेगा. मेले के सफल और सुरक्षित आयोजन को लेकर स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं. इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है.
1. त्वरित जानकारी सारणी (Quick Info Table)
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| मुख्य आयोजन | सूफी संत ख्वाजा अब्दुल हलीम शाह चिश्ती का 779वां उर्स व सद्भावना मेला |
| मेला अवधि | 26 जून से 30 जून तक (5 दिवसीय) |
| स्थान | मेहसी, पूर्वी चंपारण |
| गद्दीनशीन | सैयद शमीम अहमद चिश्ती |
| ऐतिहासिक कालखंड | लगभग 1200–1300 ईस्वी |
| पारंपरिक तिथि | बकरीद के अवसर पर जुलहिज्जा माह की 8वीं से 12वीं तारीख तक |
2. ‘मेहसी’ नाम की उत्पत्ति और ऐतिहासिक मान्यताएं
स्थानीय बुजुर्गों और ऐतिहासिक लोक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थल का इतिहास लगभग 1200 से 1300 ईस्वी के कालखंड से जुड़ा हुआ माना जाता है.
- सूफी संत का आगमन: मान्यता है कि उस दौर में गंडक नदी के किनारे सूफी संत का काफिला यहां आकर रुका था और यहीं से इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व स्थापित हुआ.
- कवारी गाय और दूध का चमत्कार: लोक कथाओं के अनुसार, इस स्थल पर सूफी संत की मुलाकात महेश राउत नामक व्यक्ति से हुई थी. एक प्रसंग में संत द्वारा महेश राउत की कवारी गाय से दूध निकालने की करामात का उल्लेख मिलता है, जिसे स्थानीय लोग गहरी आस्था से जोड़कर देखते हैं.
- नामकरण का इतिहास: महेश राउत के नाम पर ही इस पूरे क्षेत्र का नामकरण होने की लोकमान्यता प्रचलित है, जिससे कालांतर में अपभ्रंश होकर “मेहसी” नाम की उत्पत्ति हुई.
3. गद्दीनशीन का बयान और भीड़ पर गर्मी का असर
गद्दीनशीन सैयद शमीम अहमद चिश्ती के अनुसार, यह आयोजन सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसे हर वर्ष इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार बकरीद के मौके पर जुलहिज्जा माह की 8वीं से 12वीं तारीख तक नियमित रूप से मनाया जाता है.
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष लगभग चार लाख श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक मेले में शिरकत की थी. इस वर्ष भी देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी अकीदतमंदों के पहुंचने की पूरी उम्मीद है. हालांकि, वर्तमान में पड़ रही अत्यधिक गर्मी और भीषण लू के कारण इस बार श्रद्धालुओं की भीड़ पर कुछ आंशिक प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
4. सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
मेले के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं. भीड़ नियंत्रण, सुचारू यातायात व्यवस्था और भीषण गर्मी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला परिसर और संवेदनशील पॉइंट पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है.
यह मेला लंबे समय से हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के बीच आपसी भाईचारे, कौमी एकता और अटूट सांप्रदायिक सौहार्द का एक अनूठा और बड़ा प्रतीक माना जाता है.
