Motihari News: पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) विभाग के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है. एक तरफ जहां विभाग व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अनियमितता पर नकेल कसने के लिए तेजी से डिजिटल प्रणाली अपनाने का दम भर रहा है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. सेविकाओं को दिए गए स्मार्ट मोबाइल फोन और हर महीने इंटरनेट रिचार्ज के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन इसके बावजूद जिले के 5,598 संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था पूरी तरह ‘टाय-टाय फिस्स’ साबित हो रही है. इसका सबसे बड़ा प्रमाण सरकार के निर्देश पर गत 19 मई को जिले के सभी 27 प्रखंडों में आयोजित किया गया ‘सहयोग शिविर’ बना, जहां पहले ही शिविर में आम जनता ने आंगनबाड़ी केंद्रों के खिलाफ शिकायतों के 6 हजार आवेदनों का पहाड़ खड़ा कर दिया.
पोषाहार वितरण में धांधली
विभागीय सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सहयोग शिविरों में आम जनता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों में सबसे ज्यादा मामले हर महीने होने वाले पोषाहार वितरण में बड़े पैमाने पर की जा रही अनियमितता से जुड़े हैं. इसके अलावा, ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए आवेदन दिए हैं कि कई केंद्रों का संचालन नियमों को ताक पर रखकर सेविकाओं द्वारा अपने रसूखदार रिश्तेदारों के नाम पर निजी दरवाजों और घरों में किया जा रहा है. शिकायतों में यह भी कहा गया है कि केंद्रों पर बच्चों को तय सरकारी मेन्यू और नियमित संख्या के अनुसार पोषाहार का लाभ नहीं मिलता है, कई केंद्र अक्सर बंद रहते हैं और सेविका-सहायिकाएं अपनी मनमानी करती हैं.
कागजों पर हर महीने 7 करोड़ का खर्च
जिला आईसीडीएस विभाग के कागजी रजिस्टरों और दावों के मुताबिक, जिले के सभी 5,598 आंगनबाड़ी केंद्रों पर तकरीबन ढाई लाख (2,50,000) बच्चों को प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (Pre-school Education) और पोषण देने का दावा किया जाता है. इस व्यवस्था के तहत सिर्फ पोषाहार वितरण मद में विभाग द्वारा हर महीने महज एक दिन के भीतर करीब छह से सात करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाती है. इतनी बड़ी बजटीय राशि और डिजिटल मॉनिटरिंग के दावों के बीच एक ही दिन में छह हजार गंभीर शिकायतों का सामने आना विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली, सुशासन के दावों और भ्रष्टाचार नियंत्रण की नीति पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है.
शिकायतों की जांच शुरू
सहयोग शिविर में आई शिकायतों के इस अंबार और प्रशासनिक हलचल को लेकर जब जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो पूर्वी चंपारण की प्रभारी आईसीडीएस जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (डीपीओ) निधि कुमारी ने बताया कि सहयोग शिविर के माध्यम से जितनी भी बड़ी संख्या में शिकायत पत्र और आवेदन प्राप्त हुए हैं, विभाग उन्हें बेहद गंभीरता से ले रहा है. सभी आवेदनों का तेजी से संकलन और वर्गीकरण कर निष्पादन (निवारण) कार्य शुरू कर दिया गया है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रखंडवार सभी शिकायतों की धरातल पर जांच कराई जा रही है, संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPO) और सुपरवाइजरों से जवाब-तलब किया जा रहा है. जांच में जो भी सेविका, सहायिका या विभागीय कर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ चयनमुक्ति (सेवा समाप्ति) सहित सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
मोतिहारी से सामंत कुमार गौतम की रिपोर्ट
