Motihari News: खाद माफियाओं पर कृषि विभाग का बड़ा प्रहार, गड़बड़ी मिलने पर दो दिन में दर्ज होगी एफआईआर

Motihari News: पूर्वी चंपारण के जिला कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार ने 1 मार्च से 28 मई 2026 के बीच रात 8 बजे के बाद पीओएस मशीन से हुई खाद की संदिग्ध बिक्री की जांच के आदेश दिए. रक्सौल, चकिया समेत 16 प्रखंडों के डीलर रडार पर. जानिए खबर विस्तार से…

Motihari News: पूर्वी चंपारण जिला कृषि कार्यालय ने उर्वरक (खाद) की बिक्री और वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर की जा रही अनियमितता तथा कालाबाजारी की आशंका को लेकर बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) मनीष कुमार ने जिले में यूरिया और डीएपी जैसे महत्वपूर्ण खादों की अवैध जमाखोरी पर नकेल कसने के लिए एक हाई-प्रोफाइल जांच का आदेश जारी किया है. डीएओ ने जिले के 16 चिन्हित प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों (बीएओ) को आधिकारिक पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वे 1 मार्च 2026 से 28 मई 2026 के बीच रात के वक्त हुई खाद की बिक्री की गहनता से ‘सर्जिकल’ जांच करें.

रात 8 बजे के बाद POS मशीन से खाद की बिक्री को माना ‘संदिग्ध’

जिला कृषि विभाग के संज्ञान में यह गंभीर मामला आया है कि उक्त तीन महीनों की अवधि के दौरान जिले के कई खुदरा उर्वरक विक्रेताओं (डीलर) द्वारा नियम विरुद्ध जाकर रात 8 बजे के बाद पीओएस (POS) मशीन के माध्यम से धड़ल्ले से खाद की बड़ी खेप बेची गई है. सरकारी प्रावधानों के विपरीत रात के अंधेरे में मशीनों के इस इस्तेमाल को विभाग ने बेहद ‘संदिग्ध’ माना है. जिला कृषि कार्यालय को अंदेशा है कि दिन के उजाले में किसानों को खाद की किल्लत दिखाकर इसी स्टॉक को रात के वक्त ऊंचे दामों पर नेपाल सीमा पार कराने या कालाबाजारी करने के उद्देश्य से डंप किया गया है.

स्टॉक रजिस्टर से मिलाया जाएगा डेटा

कालाबाजारी के इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए डीएओ मनीष कुमार ने संबंधित प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को त्रिस्तरीय जांच का कड़ा खाका सौंपा है:

  • वास्तविक सत्यापन: अधिकारी धरातल पर जाकर इस बात की तस्दीक करेंगे कि पीओएस मशीन की सूची में अंकित खाद की मात्रा को वास्तव में स्थानीय किसानों ने खरीदा है या सिर्फ फर्जी अंगूठा लगवाकर एंट्री की गई है.
  • जमीन का रकबा: किसानों के पास उपलब्ध कृषि योग्य भूमि (रकबे) के आधार पर खाद की वास्तविक खपत का आकलन किया जाएगा कि कहीं छोटे किसान के नाम पर भारी-भरकम खाद की एंट्री तो नहीं की गई है.
  • पंजी की सूक्ष्म जांच: दुकानों के भौतिक स्टॉक, स्टॉक रजिस्टर और वितरण पंजी (सेल रजिस्टर) का मिलान पीओएस मशीन के डिजिटल डेटा से अनिवार्य रूप से किया जाएगा.

बंजरिया से रक्सौल तक के 16 प्रखंड रडार पर

डीएओ ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि जांच के दौरान किसी भी खुदरा उर्वरक विक्रेता द्वारा कालाबाजारी, ओवररेटिंग या वित्तीय हेरफेर की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रखंड कृषि अधिकारी को दो दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपनी होगी, ताकि दोषी दुकानदारों के लाइसेंस रद्द करने और उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की कानूनी कार्रवाई तुरंत की जा सके.

विभाग का यह पत्र जिले के सीमावर्ती और प्रमुख प्रखंडों— बंजरिया, बनकटवा, चकिया, चिरैया, हरसिद्धि, कल्याणपुर, केसरिया, मधुबन, मेहसी, पहाड़पुर, पकड़ीदयाल, पताही, पिपराकोठी, रामगढ़वा, रक्सौल एवं तुरकौलिया के कृषि पदाधिकारियों को तामील करा दिया गया है. कृषि विभाग के इस अचानक लिए गए कड़े फैसले से पूरे चंपारण के खाद तस्करों और अवैध डीलरों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है.

मोतिहारी से सच्चिदानंद सत्यार्थी की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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