मोतिहारी से विदेशी दंपति कैसे गोद ले रहे हैं बच्चे? जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया और नियम

पूर्वी चंपारण का मोतिहारी सिर्फ ऐतिहासिक पहचान ही नहीं, बल्कि अनाथ बच्चों को नया परिवार दिलाने के लिए भी चर्चा में है. यहां से कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिका, स्पेन, अबू धाबी, कनाडा समेत कई देशों और भारत के विभिन्न राज्यों के दंपति बच्चों को गोद ले चुके हैं. यह संस्थान 0 से 6 साल तक के बच्चों की देखभाल करता है और गोद देने के बाद भी निगरानी रखता है.

Motihari Adoption Centre: पूर्वी चंपारण का मोतिहारी अब सिर्फ ऐतिहासिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि अनाथ और परित्यक्त बच्चों को नया परिवार दिलाने की मिसाल के लिए भी चर्चा में है. जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान देश ही नहीं, विदेशों में रहने वाले दंपतियों के लिए भी उम्मीद का केंद्र बन गया है. यहां से कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिका, स्पेन, अबू धाबी, कनाडा समेत कई देशों और भारत के विभिन्न राज्यों के दंपति बच्चों को गोद ले चुके हैं.

विदेशों तक पहुंची मोतिहारी की किलकारी

जिला बाल संरक्षण इकाई के अनुसार, जनवरी 2025 में स्पेन के एक दंपति ने यहां से एक बालक को कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लिया. वहीं, सात माह की मनीषा (काल्पनिक नाम) को अबू धाबी के एक दंपति और रौनक (काल्पनिक नाम) को स्पेन के दंपति को जिला प्रशासन की मौजूदगी में सौंपा गया.

इससे पहले जून 2023 में अमेरिका के एक दंपति ने भी यहां से एक बच्ची को गोद लिया था. सभी मामलों में केंद्रीय दत्तक ग्रहण नियमों का पालन करते हुए प्रक्रिया पूरी की गई.

देश के कई राज्यों के परिवार भी बना चुके हैं अभिभावक

मोतिहारी के इस संस्थान से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र के कई दंपति भी बच्चों को गोद ले चुके हैं.

  • कानपुर के दंपति ने 6 वर्षीय बालक को अपनाया.
  • नैनीताल (उत्तराखंड) के दंपति ने शुभम (काल्पनिक नाम) को गोद लिया.
  • सितंबर 2024 में गुजरात के एक दंपति ने चार वर्षीय बालिका को अपनाया.
  • जनवरी 2022 में महाराष्ट्र के एक दंपति को भी बच्ची सौंपी गई थी.

0 से 6 साल तक के बच्चों की होती है देखभाल

संस्थान में मुख्य रूप से 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों को रखा जाता है. यहां बच्चों की चिकित्सा, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है. वर्तमान में संस्थान में सात बच्चे रह रहे हैं, जिनकी देखभाल विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है.

ऐसे होती है गोद लेने की प्रक्रिया

जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक अक्षय कुमार ने बताया कि बच्चा गोद लेने के इच्छुक दंपतियों को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है. इसके बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और पात्रता के आधार पर बच्चे को दंपति को सौंपा जाता है.

गोद देने के बाद भी रहती है निगरानी

अक्षय कुमार ने बताया कि बच्चा गोद दिए जाने के बाद भी विभाग नियमित रूप से उसकी देखरेख और पालन-पोषण की निगरानी करता है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चे को सुरक्षित और बेहतर पारिवारिक माहौल मिल रहा है तथा उसकी सभी जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है.

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