पूर्वी चंपारण की हर पंचायत में खुलेगा सुधा बिक्री केंद्र, ये लोग कर सकते हैं अप्लाई

बिहार सरकार पूर्वी चंपारण की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सुधा बिक्री केंद्र खोल रही है. जीविका समूह की सदस्य 19 जुलाई तक आवेदन कर सकती हैं. योजना से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

Bihar Sudha Kendra: पूर्वी चंपारण की ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और गांवों तक सुधा के डेयरी उत्पाद पहुंचाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जिले की सभी 380 पंचायतों में जीविका सुधा बिक्री केंद्र खोले जाएंगे. इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक महिलाएं 19 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं.

अब तक प्राप्त हो चुके हैं 25 आवेदन

जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सौरभ कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देश के अनुसार आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अब तक 25 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं. योजना से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में दूध और डेयरी उत्पादों की उपलब्धता भी बढ़ेगी.

75 हजार की लागत, सरकार देगी 60 हजार रुपये

प्रत्येक सुधा बिक्री केंद्र की स्थापना के लिए कुल 75,000 रुपये की लागत तय की गई है. इसमें से 60,000 रुपये सरकार अनुदान के रूप में देगी, जबकि लाभार्थी महिला को केवल 15,000 रुपये का स्वयं निवेश करना होगा.

सरकारी सहायता राशि से 300 लीटर क्षमता का डीप फ्रीजर, विजी कूलर, दुकान की ब्रांडिंग, मरम्मत और परिवहन जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

कौन कर सकता है आवेदन?

योजना का लाभ केवल जीविका स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्य ही ले सकेंगी. आवेदन के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं.

  • आवेदिका उसी पंचायत की स्थायी निवासी हो.
  • जीविका समूह की सक्रिय सदस्य हो.
  • पंचायत क्षेत्र में कम से कम 70 वर्गफुट की स्वयं की या किराये की पक्की दुकान हो.
  • दुकान में बिजली कनेक्शन उपलब्ध हो.
  • जिन महिलाओं का पहले से जीविका के साथ लेनदेन बेहतर रहा है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी.

लॉटरी से होगा चयन

यदि किसी पंचायत से एक से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो चयन ऑनलाइन रैंडमाइज्ड लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाएगा. इसके बाद जीविका और संकुल संघ की टीम भौतिक सत्यापन करेगी. सत्यापन पूरा होने के बाद जुलाई के अंत तक अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी.

गांवों में मिलेगा सुधा का हर उत्पाद

इस योजना के शुरू होने से गांवों में सुधा के दूध, दही, पनीर, घी समेत अन्य डेयरी उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे. साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

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