मोतिहारी, तुरकौलिया. प्रखंड परिसर में मनरेगा योजना से लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया जीविका भवन अब सवालों के केंद्र में आ गया है. एक ओर सरकारी धन से आधुनिक भवन तैयार है, वहीं दूसरी ओर जीविका कार्यालय अब भी किराये के मकान से संचालित हो रहा है. इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और संसाधनों के उपयोग को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि भवन का निर्माण पूरा हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक वहां न तो किसी कर्मचारी की तैनाती हुई और न ही नियमित गतिविधियां शुरू हो सकीं. भवन पर हमेशा ताला लटका रहता है, जिसके कारण वहां रखी सुविधाएं और संसाधन बेकार पड़े हैं. लोगों का कहना है कि यदि भवन का उपयोग समय पर शुरू नहीं किया गया तो उसकी स्थिति और खराब हो जाएगी. स्थानीय लोगो ने यह भी बताया कि खाली पड़े भवन के आसपास झाड़ियां और पेड़ उग आए हैं, जिससे परिसर असुरक्षित दिखने लगा है. उनका मानना है कि सरकारी संपत्ति के संरक्षण के लिए नियमित साफ-सफाई और निगरानी जरूरी है. कई ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकारी भवन उपलब्ध है तो किराये पर कार्यालय चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि भवन को जल्द चालू किया जाए, कर्मचारियों की तैनाती की जाए और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित किया जाए. प्रशासनिक अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, मुखिया रामजन्म पासवान ने बताया कि भवन बनने के बाद पंचायत से जीविका के पदाधिकारी को सौंप दिया गया है. लेकिन एक साल बीतने के बाद भी अभी तक भवन में ताला बंद पड़ा है.
तैयार भवन, किराये में दफ्तर: सवालों के घेरे में जीविका व्यवस्था
मोतिहारी के तुरकौलिया में लाखों की लागत से बना जीविका भवन एक साल से बंद है। सरकारी भवन खाली पड़ा है और कार्यालय किराये के मकान से चल रहा है।

जीविका भवन एक साल से बंद