Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले में अधिकारियों की कमी के कारण समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभार के भरोसे चल रही है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) से लेकर कई प्रखंड बाल विकास परियोजना कार्यालयों तक नियमित पदस्थापना नहीं होने से एक ही अधिकारी को कई जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं.
इस स्थिति के कारण विभागीय योजनाओं की निगरानी और समय पर कार्य निष्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.
डीपीओ के पास कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां
वर्तमान में आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी निधि कुमारी अपने विभाग के अलावा दो से तीन अन्य प्रभार भी संभाल रही हैं. उन्हें जिलाधिकारी की ओर से आईसीडीएस विभाग का प्रभार दिया गया है.
जानकारी के अनुसार, विभागीय स्तर से जिले की आवश्यकता के अनुरूप अधिकारियों की पदस्थापना नहीं होने के कारण जिला और प्रखंड स्तर पर लंबे समय से पद रिक्त हैं.
कई प्रखंड कार्यालय भी चल रहे प्रभार में
अधिकारियों की कमी का असर प्रखंड बाल विकास परियोजना कार्यालयों पर भी दिखाई दे रहा है. करीब आधा दर्जन से अधिक प्रखंड कार्यालय प्रभार में संचालित हो रहे हैं.
कई जगहों पर कंप्यूटर ऑपरेटर और सांख्यिकी सहायक के भरोसे कार्यालयी कार्य किए जा रहे हैं. वहीं लिपिक और सांख्यिकी सहायकों को भी एक से अधिक योजनाओं की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ गया है.
कई महत्वपूर्ण योजनाओं की जिम्मेदारी आईसीडीएस पर
आईसीडीएस विभाग के माध्यम से जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन, पोषाहार और टेक होम राशन का वितरण, पोषण योजनाओं की निगरानी, लाभुकों से जुड़े आंकड़ों का संधारण तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है.
ऐसे में अधिकारियों की कमी के कारण इन योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है.
रिक्त पद भरने की जरूरत
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि रिक्त पदों पर आवश्यकता के अनुरूप अधिकारियों की पदस्थापना की जाती है तो जिला और प्रखंड स्तर पर योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी हो सकेगी और प्रशासनिक व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित होगी.
