Nepal Doctors Protest: नेपाल के वीरगंज स्थित नारायणी अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए हमले के विरोध में चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है. अस्पताल के 65 चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफा देकर अपना विरोध दर्ज कराया है. इस घटनाक्रम के बाद नेपाल के स्वास्थ्य तंत्र पर भी इसका असर पड़ने लगा है.
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इस्तीफे सोमवार रात और मंगलवार दोपहर तक सौंपे गए.
70 में से 65 डॉक्टरों ने सौंपा इस्तीफा
अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. उदय नारायण सिंह ने बताया कि अस्पताल में कार्यरत 70 से अधिक चिकित्सकों में से 65 डॉक्टरों ने कार्यवाहक मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चित्तरंजन साह को अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया.
डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना सामान्य स्थिति में काम करना संभव नहीं है.
वार्ता के दौरान बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम पर्सा जिला प्रशासन कार्यालय में प्रमुख जिला अधिकारी भोला दाहाल की मौजूदगी में आंदोलनरत चिकित्सकों के साथ वार्ता हुई.
चिकित्सकों ने वार्ता के दौरान प्रमुख जिला अधिकारी और जिला पुलिस प्रमुख एसपी सुदीपराज पाठक के इस्तीफे की मांग की. आरोप है कि वार्ता समाप्त होने के बाद बाहर निकल रहे चिकित्सकों को एसपी ने दोबारा कक्ष में ले जाने की कोशिश की, जिससे डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई. इसी घटना के बाद डॉक्टरों का आक्रोश और बढ़ गया.
मरीज की मौत के बाद शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा मामला पिछले शनिवार को नारायणी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज की मौत के बाद शुरू हुआ था. परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की और ड्यूटी पर तैनात डॉ. प्रमोद राम के साथ कथित रूप से मारपीट की, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए.
डॉ. प्रमोद राम का इलाज फिलहाल काठमांडू में चल रहा है. इस घटना के विरोध में वीरगंज के चिकित्सक रविवार से हड़ताल पर हैं.
नेपाल चिकित्सक संघ ने भी किया बड़ा ऐलान
घटना के बाद नेपाल चिकित्सक संघ ने आरोप लगाया कि दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और आंदोलन के दौरान पुलिस ने भी चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार किया.
संघ ने मंगलवार को देशभर के अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखने की घोषणा की है. साथ ही चेतावनी दी है कि दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन और तेज किया जाएगा.
मंत्रालय ने जारी किया निर्देश
वहीं, स्वास्थ्य एवं खाद्य स्वच्छता मंत्रालय ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि स्वास्थ्य सेवाएं अत्यावश्यक हैं और किसी भी परिस्थिति में उपचार सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए.
मंत्रालय ने कहा है कि हमले में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. साथ ही सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.
