Motihari Cyber Fraud: मोतिहारी जिले में साइबर शातिरों का नेटवर्क लगातार पैर पसार रहा है. ताजा मामले में साइबर अपराधियों ने दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों के खाताधारकों को निशाना बनाते हुए करीब ढाई लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली. पहले मामले में ढाका क्षेत्र के एक व्यक्ति के निजी बैंक खाते से अचानक 1.57 लाख रुपये उड़ा लिए गए, जबकि दूसरी वारदात में मोबाइल फोन को कथित तौर पर रिमोट कंट्रोल में लेकर इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) खाते से नौ बार में कुल 93,547.16 रुपये की चपत लगा दी गई. दोनों घटनाओं को लेकर पीड़ितों ने साइबर थाना पहुंचकर लिखित तहरीर दी है, जिसके बाद पुलिस वित्तीय कड़ियों की पड़ताल में जुट गई है.
रात में बिना किसी ओटीपी साझा किए खाते से उड़े 1.57 लाख रुपये
पहली घटना ढाका थाना क्षेत्र के बरहरवा सिसवा निवासी संजीत कुमार के साथ घटी. पीड़ित संजीत कुमार के अनुसार, रात करीब 10:36 बजे उनके एचडीएफसी बैंक खाते से अचानक 1.57 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी हो गई. पीड़ित का दावा है कि उन्होंने न तो किसी अनजान व्यक्ति के साथ कोई वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) साझा किया था और न ही किसी वित्तीय लेन-देन की अनुमति दी थी. जब उन्होंने बैंक से संपर्क कर विवरण जुटाया, तो पता चला कि यह पूरी राशि क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन के माध्यम से निकाली गई है. ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर थाने में लिखित आवेदन देकर राशि होल्ड कराने की गुहार लगाई.
मोबाइल हैक कर 24 घंटे में नौ बार में ट्रांसफर की गई रकम
दूसरी वारदात नानोरा निवासी विकास कुमार के साथ घटी, जिनका खाता इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) में है. दी गई शिकायत के अनुसार, दोपहर करीब 1:30 बजे उनका स्मार्टफोन कथित रूप से एक अज्ञात साइबर अपराधी के डिजिटल नियंत्रण (रिमोट एक्सेस) में चला गया. फोन हैक होते ही 24 घंटे के भीतर उनके खाते से लगातार नौ अलग-अलग अवैध लेन-देन किए गए और कुल 93,547.16 रुपये निकाल लिए गए. पीड़ित ने बताया कि यह रकम अलग-अलग मोबाइल नंबरों से जुड़े अज्ञात बैंक खातों और त्वरित भुगतान प्रणाली (यूपीआई) के जरिए भेजी गई है. पीड़ित ने भी तत्काल 1930 पर कॉल कर लेन-देन फ्रीज कराने की मांग की.
बैंक खातों और ट्रांजैक्शन ट्रेल की जांच में जुटी साइबर सेल: इंस्पेक्टर
दोनों ही मामलों में साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान शुरू कर दिया है. साइबर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर मनीष कुमार ने बताया कि पीड़ितों द्वारा दिए गए लेन-देन विवरण, संबंधित बैंक खातों, संदिग्ध मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी की गहन जांच की जा रही है. नोडल अधिकारियों से पत्राचार कर खातों को डेबिट फ्रीज कराने की प्रक्रिया जारी है, ताकि राशि की रिकवरी कराई जा सके. पुलिस अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान ऐप को मोबाइल में इंस्टॉल न करें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं.
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