खेतों से निकल जकार्ता पहुंची चंपारण की बेटी, केशर राज ने तलवारबाजी में दुनिया में लहराया परचम

मोतिहारी की फेंसिंग खिलाड़ी केशर राज कभी खेतों में तलवारबाजी का अभ्यास करती थीं. मेहनत के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीते और जकार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व किया. अब उनकी नजर ओलंपिक पदक पर है.

चंपारण प्राइड: बिहार की मिट्टी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ सही अवसर और हौसले की. पूर्वी चंपारण के मोतिहारी के अंबिकानगर की रहने वाली फेंसिंग खिलाड़ी केशर राज इसकी मिसाल हैं. कभी खेतों को ही अभ्यास का मैदान बनाने वाली केशर ने मेहनत और जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया. जिला खेल भवन में प्रभात खबर से खास बातचीत में उन्होंने अपने संघर्ष, प्रशिक्षण और देश के लिए खेलने के अनुभव साझा किए. अब उनकी नजर ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीतने पर है.

खेत बना अभ्यास का मैदान

केशर राज के लिए तलवारबाजी का सफर आसान नहीं रहा. शुरुआती दिनों में उनके पास आधुनिक खेल सुविधाएं और उचित अभ्यास मैदान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा. संसाधनों की कमी के बीच खेतों में ही फेंसिंग की तैयारी करती रहीं.

केशर बताती हैं कि शुरुआत में जो सुविधाएं उपलब्ध थीं, उन्हीं के सहारे उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी. लगातार मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनके खेल को नई पहचान दी. आज उन्हें खेल प्रेमी आधुनिक 'झांसी की रानी' के रूप में भी देखते हैं.

कम उम्र में जीते कई मेडल

केशर ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी. वर्ष 2019 में उन्होंने अपने आयु वर्ग में पहली बार स्टेट चैंपियन का खिताब जीता.

इसके बाद 2022-23 में नेशनल स्तर पर अंडर-12 मिनी कैटेगरी में कांस्य पदक हासिल किया. 2023-24 में सब-जूनियर एकल कैटेगरी में भी उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया.

जकार्ता में पहनी भारत की जर्सी

केशर के करियर में सबसे अहम पड़ाव एशियन कैडेट फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 रहा. उनके प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय टीम में उनका चयन हुआ. इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित प्रतियोगिता के गर्ल्स फॉयल इवेंट में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया.

मोतिहारी की गलियों और खेतों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जर्सी पहनना केशर के लिए खास अनुभव रहा. उनके इस प्रदर्शन से जिले के खेल प्रेमियों और फेंसिंग संघ में भी उत्साह है.

बोलीं- तलवारबाजी एकाग्रता का खेल

केशर के मुताबिक फेंसिंग सिर्फ शारीरिक ताकत का खेल नहीं है. इसमें एकाग्रता, मानसिक मजबूती और सही समय पर फैसला लेने की क्षमता बेहद जरूरी है. उनका मानना है कि खिलाड़ियों को सुविधाओं की कमी से निराश होने के बजाय उपलब्ध संसाधनों से शुरुआत करनी चाहिए.

उनकी मां कुमारी रानी ने भी इस सफर में उनका लगातार साथ दिया. परिवार के सहयोग और खुद की मेहनत से केशर ने मुश्किल परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.

अब ओलंपिक में मेडल का सपना

अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने के बाद केशर का लक्ष्य अब और बड़ा हो गया है. वह देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना चाहती हैं. उनका सफर उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को रोक देते हैं.

केशर की कहानी बताती है कि सही लक्ष्य, लगातार अभ्यास और मजबूत इरादे हों तो खेत से शुरू हुआ सफर भी अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंच सकता है.

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By Intejarul Haq

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