Motihari Fertilizer Raid: पूर्वी चंपारण जिले के बंजरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मण चौक और इसके आसपास के इलाकों में अवैध रूप से संचालित खाद गोदामों पर प्रशासन का शिकंजा कस गया है. गुप्त सूचना के आधार पर सील किए गए विभिन्न गोदामों में रखे उर्वरक के बैगों की गिनती का काम बुधवार को प्रशासनिक देखरेख में पूरा कर लिया गया. दंडाधिकारी सह अंचलाधिकारी (सीओ) कृष्ण प्रताप सिंह की प्रत्यक्ष मौजूदगी में यह गिनती संपन्न कराई गई. हालांकि, गिनती का कार्य पूरा हो जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन या कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से बरामद खाद की कुल संख्या का आधिकारिक आंकड़ा अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.
गुप्त सूचना पर सदर एसडीओ और डीएसपी ने की थी छापेमारी
यह पूरी प्रशासनिक कार्रवाई सदर एसडीओ अरुण कुमार और डीएसपी दिलीप कुमार को मिली गुप्त सूचना के आधार पर शुरू हुई थी. सूचना के आधार पर सोमवार को सबसे पहले लक्ष्मण चौक स्थित मिथिलेश कुमार सुनील कुमार के प्रतिष्ठान व गोदाम पर छापेमारी की गई थी. इसके बाद मंगलवार को कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए ''तरुण खाद बीज भंडार'' के तीन अन्य गोदामों—बंजरिया पोखरा, चांटी माई और अंबिका नगर में सघन औचक छापेमारी की गई थी. इन सभी गोदामों में भारी मात्रा में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक स्टॉक किए जाने की बात सामने आई थी.
लाइसेंस कहीं और गोदाम कहीं और, सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
जांच प्रक्रिया के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर अनियमितता उजागर हुई है. जांच टीम को मिले दस्तावेजों के अनुसार, फर्म मिथिलेश कुमार सुनील कुमार के खाद लाइसेंस पर व्यापारिक पता आजाद नगर, मोतिहारी दर्ज है. इसके विपरीत, नियमों को ताक पर रखकर खाद के विशाल गोदाम का संचालन बंजरिया थाना क्षेत्र के अंबिका नगर में धड़ल्ले से किया जा रहा था. इस तरह बिना वैध अनुमति और पते के अंतर वाले गोदाम में अवैध भंडारण पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया है.
भारी स्टॉक के चलते लंबी चली गिनती, तैनात रहे जवान
गोदामों में उर्वरक की बोरियों का अत्यधिक बड़ा स्टॉक मौजूद होने के कारण गिनती का कार्य कई चरणों में और काफी देर तक चला. सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए सदर एसडीओ ने सभी चिह्नित गोदामों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारियों और सशस्त्र जवानों की चौबीसों घंटे तैनाती कर रखी थी. इधर, बरामदगी और आगे की विधिक कार्रवाई की विस्तृत जानकारी लेने के लिए जब सदर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सुरेश प्रसाद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया. अब पूरे क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस अवैध सिंडिकेट और खाद माफियाओं के खिलाफ कब तक प्राथमिकी दर्ज कर ठोस कानूनी कार्रवाई करता है.
