विद्यार्थी सहयोग शिविर: जिले के विद्यालयों और छात्रावासों में अब हर महीने विद्यार्थियों की समस्याएं सुनी जाएंगी. इसके लिए प्रत्येक माह के अंतिम मंगलवार को ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ आयोजित किया जाएगा. शिविर में छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद कर उनकी शैक्षणिक और छात्रावास से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली जाएगी. प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों तक भेजकर 30 दिनों के भीतर समाधान कराने पर जोर रहेगा.
डीएम ने तैयारियों की समीक्षा की
जिलाधिकारी आनंद शर्मा की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से बैठक हुई, जिसमें विद्यार्थी सहयोग शिविर के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की गयी. डीएम ने संबंधित पदाधिकारियों को शिविर के सफल और प्रभावी आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की ओर से मिलने वाली प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाये.
छात्र सीधे बता सकेंगे अपनी समस्या
शिविर के दौरान विद्यालयों और छात्रावासों में विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया जायेगा. छात्र अपनी पढ़ाई, विद्यालय की व्यवस्था या छात्रावास से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को अधिकारियों के सामने रख सकेंगे. इसके बाद शिकायतों को संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए भेजा जायेगा.
30 दिन में समाधान पर फोकस
विद्यार्थी सहयोग शिविर की सबसे अहम बात शिकायतों के समयबद्ध निपटारे को लेकर है. प्रशासन ने संबंधित विभागों को प्राप्त शिकायतों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है. डीएम ने अधिकारियों को शिकायतों का सिर्फ संधारण नहीं, बल्कि उनके समाधान की नियमित निगरानी करने का भी निर्देश दिया.
हर महीने के अंतिम मंगलवार को आयोजन
‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ की शुरुआत 17 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की थी. अब इसका आयोजन प्रत्येक माह के अंतिम मंगलवार को जिले के विद्यालयों और छात्रावासों में किया जाना है. बैठक में विद्यार्थियों की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने, शिकायतों के संधारण और उनके अनुश्रवण की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया.
हेल्पलाइन 1100 पर भी दर्ज करा सकेंगे शिकायत
विद्यार्थी अपनी समस्या या शिकायत सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन शिकायत के लिए sahyog.bihar.gov.in पोर्टल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. प्रशासन का उद्देश्य विद्यार्थियों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनकर उनका प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है.
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