झंझारपुर. मधेपुर टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, मधेपुर द्वारा “शिक्षा की भूमिका से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति” विषय पर दयाराम उच्च विद्यालय, भेजा, मधेपुर में एक सेमिनार का आयोजन किया गया. इस सेमिनार का उद्देश्य छात्रों में सतत विकास, सामाजिक जिम्मेदारी एवं शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था. सेमिनार का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ. इसके बाद तिलावत-ए-क़ुरआन, सरस्वती वंदना से किया गया. सेमिनार के मुख्य वक्ता डॉ. बिमलेश कुमार सिंह, सहायक प्राध्यापक मधेपुर टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, मधेपुर थे. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ने बताया कि शिक्षा न केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम है, बल्कि यह गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण तथा समावेशी समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। छात्रों को यह समझाया गया कि शिक्षित नागरिक ही सतत विकास लक्ष्यों को व्यवहार में उतार सकते हैं. सेमिनार के दूसरे विशेषज्ञ सुशील कुमार रॉय ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, वैज्ञानिक सोच और वैश्विक दृष्टिकोण का विकास होता है, जो सतत विकास के लिए अनिवार्य है. सेमिनार के तीसरे विशेषज्ञ दिव्यांशु शेखर, ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की रीढ़ होती है. यह व्यक्ति में ज्ञान, कौशल, मूल्य और दृष्टिकोण का विकास करती है, जिससे वह अपने जीवन के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सके. विद्यालय के प्राध्यापक संजीव कुमार झा ने कहा कि बालिकाओं और महिलाओं को समान शैक्षिक अवसर प्रदान करने से न केवल उनका आत्मविश्वास और निर्णय-क्षमता बढ़ती है, बल्कि समाज में उनकी भागीदारी भी सुदृढ़ होती है.शिक्षा रूढ़ियों और भेदभाव को चुनौती देती है तथा समानता, सम्मान और अधिकारों की समझ विकसित करती है। इसके साथ ही, शिक्षा हाशिए पर मौजूद समुदायों को मुख्यधारा से जोड़कर सामाजिक न्याय को बढ़ावा देती है. व्याख्यता मुजाहिद हुसैन, अविनाश कुमार सहित अन्य ने संबोधित किया.
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