Madhubani News : मधुबनी.
ज्ञान, विद्या और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा के लिए पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण है. गुरुवार को ही मंदिरों, विद्यालयों, पुस्तकालयों और घर-घर में पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. श्वेत वस्त्रों में सजी मां सरस्वती की प्रतिमाएं श्रद्धा और शांति का संदेश दे रही हैं. बसंत पंचमी का दिन कला और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित माना गया है. शुक्रवार 23 जनवरी को माता सरस्वती की विशेष रूप से पूजा की जाएगी. वहीं, इस बार बसंत पंचमी बेहद खास रहने वाली है, कारण इस शुभ अवसर पर बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होगा. साथ ही, चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु रहेंगे. ऐसे में बसंत पंचमी के दिन बेहद शुभ संयोग बन रहा है. पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी, गुरुवार के दिन रात में 2 बजकर 29 मिनट से होगी और इसका समापन 23 जनवरी, शुक्रवार को रात में 1 बजकर 47 मिनट पर होगा. और इसी दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाएगी. ऐसा करने से जातक के ज्ञान, कला और बुद्धि में वृद्धि होती है. साथ ही, माता सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है. यह तिथि छात्रों के लिए भी उत्तम संयोग बना रही है. इस त्योहार के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन भी माना जाता है. पूजा की श्वेतिमा मन को पवित्र करने और जीवन में संतुलन लाने का प्रतिक है. आज का दिन भक्ति, साधना और आध्यात्मिक शांति का अनुपम संगम बनेगा.आकर्षक तरीके से सजा पूजा पंडाल, श्रद्धा और सौंदर्य का अद्भुत संगम
सरस्वती पूजा के लिए पूजा पंडाल आकर्षक और मनोहारी अंदाज में सजाए गए हैं. रंग-बिरंगी लाइटों, पुष्प सज्जा और कलात्मक सजावट से पंडाल दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. हर कोना भक्ति और सृजनात्मकता की अनुभूति करा रहा है. पंडालों में श्वेत और पीले रंग की थीम के साथ कमल, वीणा, पुस्तक और हंस के प्रतीकों को उकेरा गया है, जो मां सरस्वती के स्वरूप को और भी दिव्य बना रहे हैं. पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक लाइटिंग का सुंदर मेल देखते ही बन रहा है.
प्रतिमा ले जाने की दिनभर लगी रही होड़
सरस्वती पूजा के लिए गुरुवार की सुबह से ही उत्साह चरम पर देखा जा रहा. कारीगरों के यहां से लेकर पूजा पंडालों तक माता सरस्वती की प्रतिमा ले जाने की दिनभर होड़ लगी रही. ढोल-नगाड़ों, जयकारों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ प्रतिमाओं को पूजा स्थलों तक ले जाते दिखे. वहीं, शुक्रवार को शुभ मुहूर्त में छात्र-छात्राएं पूरे विधि-विधान से माता सरस्वती की पूजा-अर्चना करेंगे. किताबें, कलम और वाद्य यंत्र मां के चरणों में अर्पित कर विद्या, विवेक और सफलता की कामना करेंगे. पूरे क्षेत्र में भक्ति, उल्लास और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है.
बसंत पंचमी पर बन रहा शुभ संयोग
23 जनवरी, शुक्रवार के दिन यानी बसंत पंचमी पर चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होने जा रहा है. वहीं, चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग बन रहा है. ज्ञान के कारक गुरु की राशि में बैठकर चंद्रमा का गजकेसरी योग बनाना अत्यंत शुभ है. यह छात्रों के लिए उत्तम संयोग बना रहा है. बसंत पंचमी पर सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 11 बजकर 13 मिनट का समय शिक्षा आरंभ के लिए सबसे उत्तम रहेगा.
सरस्वती पूजा के लिए यह है शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने के लिए सुबह 9 बजकर 53 मिनट से लेकर 11 बजकर 13 मिनट तक का समय सबसे उत्तम रहेगा. इस दिन लोग अपने घर, कॉलेज, स्कूल और कार्यस्थल पर देवी सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करते हैं. साथ ही, माता से ज्ञान प्राप्ति की कामना करते हैं. पूजा के दौरान देवी सरस्वती को सिंदूर, श्रृंगार आदि की वस्तुएं भी अर्पित की जाती हैं. और गुलाल चढ़ाया जाता है. इसी दिन से बसंत ऋतु का आरंभ हो जाता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
