Madhubani News: सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में सोमवार को 11 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया. परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ करने के साथ चिकित्सक से हाथापाई का भी आरोप लगाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने नगर थाना पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार महिला पुलिसकर्मियों एवं जवानों के साथ अस्पताल पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया. सिविल सर्जन ने भी इमरजेंसी पहुंचकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
इलाज के दौरान 11 वर्षीय बच्चे की हुई मौत
तमुरिया निवासी शंकर ठाकुर का 11 वर्षीय पुत्र अपने ननिहाल राजनगर के सिमरी आया था. परिजनों के अनुसार, रविवार को सड़क पार करने के दौरान स्कूटी की चपेट में आने से उसके पेट के निचले हिस्से में चोट लगी थी. सोमवार को परिजन बच्चे को इलाज के लिए सदर अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे.
इलाज के बाद वार्ड में किया गया था शिफ्ट
इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉ सीतांशु सौरभ ने बच्चे का इलाज किया, जिसके बाद उसे भर्ती कर लिया गया. दोपहर करीब दो बजे बच्चे को वार्ड में शिफ्ट किया गया. डॉक्टर के अनुसार, परिजन बाहर से अल्ट्रासाउंड जांच कराकर लाए थे. जांच में बाहरी चोट के कोई निशान नहीं मिले थे, हालांकि डॉक्टर ने अंदरूनी चोट की आशंका से इनकार नहीं किया था.
पेट दर्द बढ़ने पर डॉक्टर ने रेफर करने की कही बात
डॉ सीतांशु सौरभ के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के समय बच्चे को बुखार था, जिसे दवा देने के बाद नियंत्रित कर लिया गया. करीब 3:30 बजे तक पेट दर्द के अलावा कोई अन्य शिकायत नहीं थी. इसके बाद पेट दर्द में राहत नहीं मिलने पर करीब 3:50 बजे चिकित्सक ने परिजनों को स्थिति से अवगत कराते हुए बच्चे को रेफर करने की बात कही. हालांकि, परिजनों ने अस्पताल में ही इलाज जारी रखने का आग्रह किया.
शाम पांच बजे बिगड़ी हालत, बच्चे की मौत
चिकित्सक के अनुसार, शाम करीब पांच बजे तक बच्चे की हालत और बिगड़ गई. गैसपीन और उल्टी की स्थिति के बाद उसकी मौत हो गई. बच्चे की मौत की सूचना मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया. परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया.
परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप
परिजनों का कहना था कि यदि बच्चे को सुबह ही रेफर कर दिया जाता तो उसकी जान बच सकती थी. उनका आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें कभी इमरजेंसी तो कभी पीकू वार्ड की ओर भेजा जाता रहा. परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पीकू वार्ड में चिकित्सक मौजूद नहीं थे. इसी को लेकर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया.
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलने के बाद नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार पुलिस बल के साथ सदर अस्पताल पहुंचे. पुलिस ने परिजनों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया और स्थिति को शांत कराया. सूचना मिलने पर सिविल सर्जन भी इमरजेंसी पहुंचे और अस्पताल के चिकित्सकों एवं कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. संवाद प्रेषण तक सदर अस्पताल में पुलिस बल तैनात था. वहीं, बच्चे की मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था.
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