मधुबनी जेंडर फोरम बैठक: राजनगर प्रखंड की रघुनीदेहट पंचायत भवन में सोमवार को पंचायत स्तरीय जेंडर फोरम की मासिक बैठक हुई. इसमें महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया गया. बैठक में बाल विवाह, घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
बाल विवाह और महिला हिंसा के खिलाफ जागरूकता
जिला हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वूमेन (DHEW), मधुबनी के जिला मिशन समन्वयक अंजनी कुमार झा ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि समाज के सबसे करीब होते हैं. ऐसे में वे महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी समस्याओं को आसानी से पहचान सकते हैं.
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंद महिलाओं को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दिलाएं तथा उन्हें संबंधित सहायता सेवाओं से जोड़ें. उन्होंने बाल विवाह और महिला हिंसा के खिलाफ गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की अपील की.
बालिका शिक्षा को बताया समाज की मजबूती का आधार
लैंगिक विशेषज्ञ शिवराम मेहरा ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा मजबूत होगी तो परिवार और समाज दोनों सशक्त होंगे. उन्होंने कहा कि जेंडर समानता केवल महिलाओं से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है.
बैठक में सदस्यों ने महिलाओं और बालिकाओं के प्रति होने वाले भेदभाव को कम करने तथा उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने पर भी जोर दिया.
बैठक में हेल्पलाइन नंबरों की दी गयी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, बच्चों और आम लोगों की सहायता के लिए उपलब्ध विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गयी. सदस्यों को महिला हेल्पलाइन 181, महिला पुलिस हेल्पलाइन 1091, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपात सेवा 112 और साइबर हेल्पलाइन 1930 के बारे में बताया गया.
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा, उत्पीड़न या आपात स्थिति में संबंधित हेल्पलाइन की मदद ली जा सकती है.
पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अहम
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाओं से जुड़े मामलों के समाधान में पंचायत स्तर पर सक्रियता बढ़ाना जरूरी है. पंचायत प्रतिनिधि लोगों के बीच रहकर समस्याओं की पहचान कर सकते हैं और जरूरतमंदों को सरकारी एवं सहायता सेवाओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
कार्यक्रम में C3 की सुमन कुमारी, महिला पर्यवेक्षक सुषमा कुमारी समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बैठक में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा अधिकारों को लेकर सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर सहमति बनी.
यह भी पढे़ं:
16 साल से अटकी कन्या विवाह योजना की राशि, डीएम के सामने पहुंचा मामला
