मिथिला मैथिली के विकास के लिए एक मंच पर आये लोग: मदन मोहन झा

तीन दिवसीय मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह के दूसरे दिन दो सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया गया.

रहिका . मैथिल समाज रहिका के तत्वावधान में मध्य विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित तीन दिवसीय मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह के दूसरे दिन दो सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया गया. प्रथम सत्र मुख्य कार्यक्रम राजनीति रंजन द्वारा प्रस्तुत भगवती गीत जय जय भैरवि से शुभारंभ की गई. विद्यापति की मूर्ति पर दीप जलाकर माल्यार्पण के साथ हुई. उदघाटन बिहार सरकार के पूर्व मंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा, मुख्य अतिथि मैथिली साहित्य के प्रकांड विद्वान साहित्यकार डॉ. भीमनाथ झा को संस्था की ओर से संस्था के सचिव शीतलांबर झा, अध्यक्ष सुमन महासेठ ने पाग, चादर से सम्मानित किया. संस्था की ओर से किरण पुरस्कार हिरेन्द्र कुमार झा, यात्री पुरस्कार कविता संग्रह पंछी बनि गगन के लिए अशोक कुमार मेहता को दिया गया. आगत अतिथियों ने उदय चंद्र झा विनोद के संपादन में संस्था की ओर से प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया. संस्था के सचिव, अध्यक्ष ने प्रशस्ति पत्र, नगद राशि, पाग और चादर से सम्मानित किया. उदघाटन कर्ता मदन मोहन झा ने राजनीति से जुड़े मिथिला मैथिली प्रेमी को मिथिला के विकास के नाम पर एक मंच पर आने की बात कही. डॉ. भीमनाथ झा ने कहा कि मैथिली भाषा के साथ विवेधी करण की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आम लोगों से चिंतन करने की बात कही. उन्होंने कहा कि हमारी मातृभाषा मैथिली का विवेधी करण कर दिया गया है. मखान को मखाना कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा के अंत मे ए जोड़ देने से शब्द के अर्थ ही बदल दिया है. इस ए को हटा मखान की मांग की जाए. उन्होंने इसको लेकर सड़क से सदन तक आवाज लगाने की बात कही. संस्था के अध्यक्ष सुमन कुमार महासेठ ने कहा कि संस्था मिथिला और मैथिली को लेकर आवाज उठाती रही है. संस्था के सचिव शीतलांबर झा ने कहा कि रहिका में 52 वर्ष से लगातार मिथिला मैथिली के संवर्धन, संरक्षण, अपनी संस्कृति की रक्षा को ले मिथिला विभूति स्मृति पर्व मनाते आ रहे है. उन्होंने बताया कि समाज के सभी वर्ग के लोग इस पर्व में सहयोग करते है यह संस्था का गौरव प्राप्त है. दूसरे सत्र में साहित्यकार उदयचंद्र झा विनोद की अध्यक्षता में विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. डॉ. भीमनाथ झा, अमलेन्दु शेखर पाठक, मनिकांत झा, दिलीप कुमार झा, कुंज बिहारी के आलावे दो दर्जन से अधिक कविजनो ने अपनी कविता प्रस्तुति कर श्रोता से तालियां बटोरी.

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Author: DIGVIJAY SINGH

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