मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट
Madhubani News: मधुबनी जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में शुक्रवार को राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्यों और स्थानीय चिकित्सकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई. विवाद के बाद सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा करीब डेढ़ घंटे तक प्रभावित रही.
चिकित्सकों ने लगाए गंभीर आरोप
चिकित्सकों का आरोप है कि राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य रूबेल रविदास और संजय कुमार ने बैठक के दौरान अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया.
इस मामले को लेकर सदर अस्पताल के पीकू वार्ड में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार की मौजूदगी में प्रेस वार्ता आयोजित की गई.
सिविल सर्जन ने बताया कि जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम और बीसीएम के साथ बैठक चल रही थी. इसी दौरान ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. अशोक कुमार आनंद ने स्वास्थ्य कारणों से खड़े होने में असमर्थता जताई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया.
1.20 लाख रुपये मांगने का आरोप
चिकित्सकों का आरोप है कि बैठक के दौरान आयोग के सदस्यों ने अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और प्रत्येक पीएचसी से 1 लाख 20 हजार रुपये की मांग की.
भासा के सचिव डॉ. कुणाल कौशल ने कहा कि आयोग सदस्य के व्यवहार से चिकित्सक आक्रोशित हो गए थे और विरोध में ओपीडी बहिष्कार का निर्णय लिया गया था. हालांकि बाद में जिलाधिकारी आनंद शर्मा के हस्तक्षेप के बाद मरीजों के हित में सेवा बहाल कर दी गई.
आयोग सदस्यों ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर आयोग सदस्य संजय कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि बैठक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा को लेकर आयोजित की गई थी और अस्पतालों में सुधार को लेकर निर्देश दिए जा रहे थे.
उनका आरोप है कि कुछ चिकित्सक और यूनियन नेता सर्किट हाउस पहुंचकर हंगामा करने लगे और पूरे मामले को गलत दिशा देने का प्रयास किया.
वहीं रूबेल रविदास ने भी पैसों की मांग के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मुद्दा उठाया गया था, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है.
जांच में जुटा प्रशासन
घटना के बाद नगर थाना और अनुसूचित जाति-जनजाति थाना में लिखित शिकायत दी गई है. फिलहाल जिला प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.
