Madhubani News: राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों की मासिक समीक्षा बैठक सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई. बैठक में जिले में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. इस दौरान राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत निर्धारित 95:95:99 लक्ष्य और ईवीटीएचएस के अंतर्गत ट्रिपल एलिमिनेशन (तीन बीमारियों के उन्मूलन) को सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया.
क्या है 95:95:99 का लक्ष्य?
बैठक में समझाते हुए बताया गया कि पहले ’95’ के तहत जिले की जनसंख्या के आधार पर एचआईवी जांच करना है. दूसरे ’95’ के तहत जांच में संक्रमित पाए गए मरीजों में से 95 प्रतिशत को नियमित दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है. वहीं, अंतिम ’99’ के तहत दवा का सेवन करने वाले 99 प्रतिशत मरीजों की भायरल लोड जांच शामिल है, ताकि बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सके. इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस-बी जांच अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया ताकि आने वाले बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सके.
ओपीडी के 10 प्रतिशत मरीजों की होगी अनिवार्य जांच
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने स्पष्ट कहा कि पात्र लाभुकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है. उन्होंने इंडेक्स टेस्टिंग को प्रभावी बनाने और ‘लॉस्ट टू फॉलो अप’ (इलाज बीच में छोड़ने वाले) मरीजों की पहचान कर उन्हें दोबारा उपचार से जोड़ने पर जोर दिया. सभी स्वास्थ्य संस्थानों के ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में से कम-से-कम 10 प्रतिशत की एचआईवी, सिफलिस और यक्ष्मा (टीबी) जांच करने का निर्देश दिया गया. इसके अलावा एसओसीएच और एचएमआईएस पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा एंट्री समय पर करने की बात कही गई. बैठक में सीडीओ डॉ. गिरींद्र मोहन ठाकुर, एआरटी नोडल पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार समेत तकनीकी विशेषज्ञ और केयर सपोर्ट सेंटर के कर्मी मौजूद रहे.
मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट
