Madhubani News: उत्तर बिहार में मानसून के दस्तक देने के साथ ही संभावित बाढ़ की विभीषिका और जलजमाव से निपटने के लिए मधुबनी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है. जिले में हर साल आने वाली बाढ़ के दौरान जान-माल की सुरक्षा और जल-जनित महामारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है.
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक (ED) सुहर्ष भगत द्वारा जारी कड़े दिशा-निर्देशों के आलोक में मधुबनी के सिविल सर्जन (CS) डॉ. हरेंद्र कुमार ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है.
जिले के 5 प्रखंड सबसे संवेदनशील, ‘महामारी रोकथाम समिति’ सक्रिय
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मधुबनी जिले के पांच प्रखंड बाढ़ और जलजमाव के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं. इन क्षेत्रों में बाढ़ के दौरान और उसके बाद बड़े पैमाने पर जल-जनित बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है.
बाढ़ की सीधी जद में आने वाले मुख्य प्रखंड:
- बेनीपट्टी
- बिस्फी
- मधवापुर
- मधेपुर
- घोघरडीहा
सिविल सर्जन ने बताया कि जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय महामारी रोकथाम समिति का गठन किया गया है. इस विशेष समिति में उप विकास आयुक्त (DDC), पुलिस अधीक्षक (SP), सिविल सर्जन, आपूर्ति विभाग, जिला आपदा प्रबंधन विभाग तथा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के आला अधिकारी शामिल हैं. यह समिति पूर्व के कड़वे अनुभवों के आधार पर संभावित बीमारी वाले हॉटस्पॉट को चिन्हित कर वहां तुरंत उपचारात्मक और निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी.
एक नजर में: स्वास्थ्य विभाग की बाढ़ पूर्व रणनीतिक तैयारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आम नागरिकों को त्वरित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई प्रशासनिक रूपरेखा नीचे तालिका में स्पष्ट है:
| मुख्य रणनीति / पैरामीटर | प्रशासनिक कार्ययोजना (Action Plan 2026) |
|---|---|
| वैकल्पिक स्वास्थ्य केंद्र | बाढ़ में अस्पताल डूबने की स्थिति में स्कूलों व पंचायत भवनों में चलेंगे अस्थायी अस्पताल. |
| नौका औषधालय (Boat Dispensary) | सड़क संपर्क टूटने पर टापू जैसे बने गांवों तक नाव पर दवा और डॉक्टरों की टीम पहुंचेगी. |
| गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग | आशा और एएनएम द्वारा प्रसव तिथि वाली महिलाओं की सूची और डिलीवरी किट की तैयारी. |
| राहत कैंपों में विशेष व्यवस्था | स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए अलग से ‘प्राइवेसी स्पेस / स्तनपान कक्ष’ का निर्माण. |
| राज्य नियंत्रण कक्ष हेल्पलाइन | किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल के लिए टोल-फ्री नंबर 104 का व्यापक प्रचार-प्रसार. |
मॉक ड्रिल का निर्देश, सर्पदंश की दवाओं की होगी प्रचुर उपलब्धता
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि केवल कागजों पर तैयारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों और क्षेत्र में सक्रिय गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ समन्वय बनाकर नियमित अंतराल पर मॉक एक्सरसाइज और मॉक ड्रिल (अभ्यास) आयोजित करने का निर्देश दिया है.
इसके साथ ही, बाढ़ के दिनों में सांप काटने (सर्पदंश) के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) सहित सभी जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बफर में रखने को कहा गया है. बाढ़ के दौरान नवजात शिशुओं का नियमित टीकाकरण किसी भी हाल में बाधित न हो, इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पैरामेडिकल स्टाफ को सौंपी गई है.
दूषित पानी और मच्छरों के खिलाफ महाअभियान: पटना में होगी वाटर टेस्टिंग
बाढ़ के थमते ही जलजमाव के कारण डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और कालाजार जैसी खतरनाक महामारियों का फैलाव तेजी से होता है.
सिविल सर्जन की सीधी हिदायत: “जिला मलेरिया पदाधिकारी को सभी बाढ़ प्रभावित और जलजमाव वाले क्षेत्रों में युद्धस्तर पर डीडीटी (DDT) का छिड़काव और फॉगिंग कराने की जिम्मेदारी दी गई है. पीएचईडी के सहयोग से पीने के पानी के बड़े स्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर डाला जाएगा. स्वच्छता निरीक्षक फील्ड से पानी के सैंपल कलेक्ट करेंगे, जिसकी कड़ाई से जांच प्रमंडलीय प्रयोगशाला, स्थानीय मेडिकल कॉलेज या सीधे लोक स्वास्थ्य संस्था पटना में कराई जाएगी ताकि दूषित पानी से होने वाले कॉलरा या डायरिया को समय रहते रोका जा सके.” — डॉ. हरेंद्र कुमार, सिविल सर्जन, मधुबनी
प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे मौसम और बाढ़ से जुड़ी किसी भी आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता या एम्बुलेंस के लिए सीधे राज्य सरकार के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 104 पर 24 घंटे संपर्क कर सकते हैं.
मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट
