झंझारपुर: डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के ऑनलाइन संवाद कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया. कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुखैत में बड़ी संख्या में किसानों ने कृषि मंत्री का संबोधन सुना. कार्यक्रम के दौरान किसानों को आधुनिक खेती, प्राकृतिक खेती और फसल में कीट-रोग प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी.
पहले चरण में केंद्रीय कृषि मंत्री ने देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों और किसानों को संबोधित किया. उन्होंने खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन पर जोर दिया.
17 सितंबर से शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा. इसकी शुरुआत 17 सितंबर को लाभार्थियों द्वारा ‘आशीर्वाद का दिया’ जलाकर की जाएगी. कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों में भी दिया जलाकर अभियान की शुरुआत होगी.
उन्होंने वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने पर जोर दिया.
किसानों को धान में कीट और रोग प्रबंधन की जानकारी
कार्यक्रम के दूसरे चरण में किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. पादप संरक्षण वैज्ञानिक डॉ राहुल सिंह राजपूत ने खरीफ फसलों में कीट और रोग प्रबंधन की जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि इस समय धान की फसल में तना छेदक और शीथ ब्लाइट का प्रकोप अधिक रहता है. इससे फसल को बचाने के लिए नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करने, संतुलित उर्वरक का प्रयोग करने और उचित जल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गयी. साथ ही अनुशंसित कीटनाशी और फफूंदनाशी के प्रयोग की जानकारी भी दी गयी.
घर और खेत के कचरे से बना सकते हैं जैविक खाद
पशुपालन एवं मत्स्य वैज्ञानिक डॉ जगपाल ने जैविक खाद और जैव संसाधन इकाइयों के बारे में किसानों को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किसान घर और खेत से निकलने वाले कचरे तथा पशु अपशिष्ट से छोटे स्तर पर जैविक खाद तैयार कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलेगी और रासायनिक खाद पर किसानों की निर्भरता कम हो सकती है.
आधुनिक खेती की जानकारी के लिए KVK से संपर्क की अपील
केवीके सुखैत की ओर से किसानों से अपील की गयी कि आधुनिक कृषि तकनीक, कीट एवं रोग प्रबंधन और जैविक खेती से जुड़ी जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में रहें. वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल उत्पादन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर विशेषज्ञों से सलाह लेने की भी जानकारी दी.
